खंड 133ख के प्रावधानों का अनुपालन करने में विफलता के लिए पेनल्टी
24[धारा 133ख के उपबंधों के पालन में असफलता के लिए शास्ति
272कक. (1) यदि कोर्इ व्यक्ति, 25[* * *] धारा 133ख के उपबंधों का अनुपालन करने में असफल रहेगा, तो उसे यथास्थिति 26[संयुक्त आयुक्त], 27[सहायक निदेशक] 28[या उपनिदेशक] या 29[निर्धारण] अधिकारी द्वारा पारित आदेश पर शास्ति के रूप में इतनी राशि का संदाय करना होगा जो एक हजार रुपए तक हो सकेगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोर्इ भी आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक उस व्यक्ति को जिस पर शास्ति अधिरोपित की जानी प्रस्तावित है मामले में सुनवार्इ का अवसर नहीं दे दिया जाता है।
24. वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 13.5.1986 से अंत:स्थापित।
25. ", युक्तियुक्त कारण के बिना" शब्दों का कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 10.9.1986 से लोप किया गया।
26. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उपायुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व, "उपायुक्त" शब्द प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "निरीक्षण सहायक आयुक्त" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया था।
27. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "निरीक्षण सहायक निदेशक" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया था।
28. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से अंत:स्थापित।
29. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

