आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 270कक

शास्ति आदि के अधिरोपण से उन्मुक्ति

धारा

धारा संख्या

270कक

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXI - शास्तियां दंड

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2023

शास्ति आदि के अधिरोपण से उन्मुक्ति

शास्ति आदि के अधिरोपण से उन्मुक्ति

शास्ति आदि के अधिरोपण से उन्मुक्ति

270कक. (1) कोई निर्धारिती धारा 270क के अधीन शास्ति के अधिरोपण और धारा 276ग या धारा 276गग के अधीन कार्यवाहियों के आरंभ किए जाने से उन्मुक्ति अनुदत्त करने के लिए निर्धारण अधिकारी को आवेदन कर सकेगा, यदि वह निम्नलिखित शर्तों को पूरा करता है,–

(क) यथास्थिति, धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 147 के अधीन निर्धारण या पुन: निर्धारण के अनुसार संदेय कर और ब्याज का ऐसी मांग की सूचना में विनिर्दिष्ट समय के भीतर संदाय कर दिया गया है; और

(ख) उपधारा (1) में निर्दिष्ट आदेश के विरुद्ध कोई अपील फाइल नहीं की गई है ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई अपील उस मास की समाप्ति से एक मास के भीतर की जाएगी जिसमें उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट आदेश प्राप्त किया गया था और आवेदन ऐसे प्ररूप में किया जाएगा तथा ऐसी रीति में सत्यापित किया जाएगा, जो विहित की जाए ।

(3) निर्धारण अधिकारी, उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने के अधीन रहते हुए और धारा 249 की उपधारा (2) के खंड (ख) में यथाविनिर्दिष्ट, अपील फाइल करने की अवधि के अवसान के पश्चात् धारा 270क के अधीन शास्ति के अधिरोपण और कार्यवाहियों के आरंभ करने से धारा 276ग या धारा 276गग के अधीन उन्मुक्ति वहां अनुदत्त करेगा, जहां शास्ति की कार्यवाहियां उक्त धारा 270क की उपधारा (9) के अधीन संस्थित न की गई हो।

(4) निर्धारण अधिकारी उस मास की समाप्ति से जिसमें उपधारा (1) के अधीन आवेदन प्राप्त किया गया था, एक मास की अवधि के भीतर ऐसे आवेदन को स्वीकार या अस्वीकार करने का आदेश पारित करेगा :

परंतु आवेदन को अस्वीकार करने का कोई आदेश निर्धारिती को सुने जाने का अवसर प्रदान किए बिना, पारित नहीं किया जाएगा ।

(5) उपधारा (4) के अधीन किया गया आदेश अंतिम होगा।

(6) उन मामलों में, जहां उपधारा (4) के अधीन कोई आदेश आवेदन को स्वीकार करने के लिए किया गया है, 1[वहां धारा 246 या धारा 246क के अधीन कोई अपील] या धारा 264 या धारा 246क के अधीन पुनरीक्षण के लिए कोई आवेदन उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट निर्धारण या पुनर्निर्धारण के आदेश के विरुद्ध ग्राह्य नहीं होगा।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप मेंें]

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