आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 269धध

कुछ उधार, निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशियां लेने या प्रतिगृहीत करने का ढंग

धारा

धारा संख्या

269धध

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXख - करापवंचन प्रतिक्रिया करने के लिए कुछ मामलों में स्वीकृति, भुगतान या भुगतान की विधि के रूप में आवश्यकता

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2017

कुछ उधार, निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशियां लेने या प्रतिगृहीत करने का ढंग

कुछ उधार, निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशियां लेने या प्रतिगृहीत करने का ढंग

85[अध्याय 20ख

कर अपवंचन को रोकने के लिए कुछ दशाओं में 86[स्वीकृति, संदाय या] प्रतिसंदाय के ढंग के बारे में अपेक्षा

87[कुछ उधार, निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशियां लेने या प्रतिगृहीत करने का ढंग

269धध. कोर्इ व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से (जिसे इसमें निक्षेपकर्ता कहा गया है) कोर्इ उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट धनराशि, पाने वाले के खाते में देय चैक या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट द्वारा या किसी बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक समाशोधन प्रणाली का उपयोग करके ही लेगा या प्रतिगृहीत करेगा अन्यथा नहीं, यदि–

(क) ऐसे उधार या निक्षेप की रकम या विनिर्दिष्ट राशि अथवा ऐसे उधार, निक्षेप और विनिर्दिष्ट राशि की कुल रकम; या

(ख) ऐसे उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशि लेने या उसका प्रतिग्रहण करने की तारीख को ऐसे व्यक्ति द्वारा उस निक्षेपकर्ता से पहले लिया गया या प्रतिगृहीत उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशि (चाहे प्रतिसंदाय शोध्य हो गया हो या नहीं) की रकम या कुल रकम, जो असंदत है; या

(ग) खंड (ख) में निर्दिष्ट रकम या कुल रकम खंड (क) में निर्दिष्ट रकम या कुल रकम के साथ मिलकर,

बीस हजार रुपए या उससे अधिक है :

परंतु इस धारा के उपबंध ऐसे किसी उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशि को लागू नहीं होंगे जो निम्नलिखित से ली अथवा प्रतिगृहीत की जाती है या ऐसे किसी उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशि को लागू नहीं होंगे जो निम्नलिखित द्वारा ली जाती है या प्रतिगृहीत की जाती है, अर्थात् :–

(क) सरकार;

(ख) कोर्इ बैंककारी कंपनी, डाकघर बचत बैंक या सहकारी बैंक;

(ग) केंद्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा स्थापित कोर्इ निगम;

(घ) कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के खंड (45) में यथापरिभाषित कोर्इ सरकारी कंपनी88;

(ड़) ऐसी अन्य संस्था, संगम या निकाय अथवा ऐसे वर्ग की संस्थाएं, संगम या निकाय जिन्हें केंद्रीय सरकार, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, राजपत्र में इस निमित अधिसूचित89 करें :

परंतु यह और कि इस धारा के उपबंध किसी उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशि को लागू नहीं होंगे जहां ऐसा व्यक्ति जिससे उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट राशि ली जाती है या प्रतिगृहीत की जाती है और ऐसा व्यक्ति जिसके द्वारा उधार या निक्षेप या विनिर्दिष्ट धनराशि ली जाती है या प्रतिगृहीत की जाती है, दोनों ही की कृषि आय है और उनमें से किसी की भी इस अधिनियम के अधीन कर से प्रभार्य कोर्इ आय नहीं है।

स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

(i) ''बैंककारी कंपनी90'' से ऐसी कंपनी अभिप्रेत है जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के उपबंध लागू होते हैं और इसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोर्इ बैंक या बैंककारी संस्था भी है;

(ii) ''सहकारी बैंक'' का वही अर्थ होगा, जो बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के भाग 5 में उसका है;

(iii) ''उधार या निक्षेप'' से धन का उधार या निक्षेप अभिप्रेत है;

(iv) ''विनिर्दिष्ट राशि'' से किसी स्थावर संपत्ति के अंतरण के संबंध में, चाहे ऐसा अंतरण होता है अथवा नहीं, अग्रिम के रूप में या अन्यथा, प्राप्य कोर्इ धनराशि अभिप्रेत है।]

 

85. आय-कर (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1981 द्वारा 11.7.1981 से अध्याय 20ख अंत:स्थापित।

86. वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1984 से अंत:स्थापित।

87. वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा 1.6.2015 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1984 से यथा अंत:स्थापित और वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.4.2015 से यथा संशोधित धारा 269धध इस प्रकार थीं:

'269धध. कुछ उधार और निक्षेप लेने या स्वीकार करने का ढंग–कोर्इ भी व्यक्ति, 30 जून, 1984 के पश्चात् किसी अन्य व्यक्ति से (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् निक्षेपकर्ता कहा गया है) कोर्इ उधार या निक्षेप, (एकाउंट पेर्इ) चैक या पाने वाले के खाते में देय (एकाउंट पेर्इ) बैंक ड्राफ्ट द्वारा या बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक समाशोधन प्रणाली का उपयोग करके ही लेगा या स्वीकार करेगा, अन्यथा नहीं, यदि–

(क) ऐसे उधार या निक्षेप की रकम अथवा ऐसे उधार और निक्षेप की कुल रकम; या

(ख) ऐसे उधार या निक्षेप लेने या स्वीकार करने की तारीख को ऐसे व्यक्ति द्वारा उस निक्षेपकर्ता से पहले लिए गए या स्वीकार किए गए उधार या निक्षेप की (चाहे वह रकम देय हो गयी हो या नहीं), असंदत्त है तो वह रकम या कुल रकम जो असंदत्त है; या

(ग) खंड(क) में निर्दिष्ट रकम या कुल रकम खंड (ख) में निर्दिष्ट रकम या कुल रकम के साथ मिलकर,

बीस हजार रुपए या उससे अधिक है :

परन्तु इस धारा के उपबंध ऐसे उधार या निक्षेप को लागू नहीं होंगे जो निम्नलिखित से लिए या स्वीकार किए जाते हैं या ऐसे उधार या निक्षेप को लागू नहीं होंगे जो निम्नलिखित द्वारा लिये या स्वीकार किये जाते हैं, अर्थात्–

(क) सरकार;

(ख) कोर्इ बैंककारी कंपनी, डाकघर बचत बैंक या सहकारी बैंक;

(ग) केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा स्थापित कोर्इ निगम;

(घ) कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में परिभाषित कोर्इ सरकारी कंपनी;

(ड़) ऐसी अन्य संस्था, संगम या निकाय अथवा ऐसे वर्ग की संस्थाएं, संगम या निकाय, जिन्हें केन्द्रीय सरकार, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, राजपत्र में इस निमित्त अधिसूचित करे :

परन्तुयह और कि इस धारा के उपबंध किसी उधार या निक्षेप को लागू नहीं होंगे, जहां ऐसा व्यक्ति जिससे उधार या निक्षेप लिया जाता है या स्वीकार किया जाता है और ऐसा व्यक्ति, जिसके द्वारा उधार या निक्षेप लिया जाता है या स्वीकार किया जाता है, दोनों ही की कोर्इ कृषि आय है और इनमें से किसी की भी इस अधिनियम के अधीन कर से प्रभार्य कोर्इ आय नहीं है।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

(i) ''बैंककारी कंपनी'' से ऐसी कंपनी अभिप्रेत है, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है और इसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट बैंक या बैंककारी संस्था भी है;

(ii) ''सहकारी बैंक'' का वही अर्थ है, जो बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के भाग 5 में उसका है;

(iii) ''उधार या निक्षेप'' से धन का उधार या निक्षेप अभिप्रेत है।'

88. ''सरकारी कंपनी'' की परिभाषा के लिए, देखिए पूर्व पृष्ठ 1.31 पर पाद-टिप्पण 88.

89. संस्थाओं का उल्लेख करने वाली अधिसूचना देखिए।

90. "बैंककारी कंपनी" के अर्थ के लिए परिशिष्ट देखिए।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा संशोधित रूप में]

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