आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 256

उच्च न्यायालय को मामलों का कथन

धारा

धारा संख्या

256

अध्याय शीर्षक

अध्याय XX - अपील और संशोधन

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2015

उच्च न्यायालय को मामलों का कथन

उच्च न्यायालय को मामलों का कथन

89[ग-उच्च न्यायालय को निर्देश

89उच्च न्यायालय को मामलों का कथन

256. 90(1) निर्धारिती या 90क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त उस तारीख के साठ दिन के भीतर, जिसको 90कक[1 अक्तूबर, 1998 से पूर्व पारित] धारा 254 के अधीन किसी आदेश की सूचना की तामील की जाती है, विहित फार्म में आवेदन द्वारा, जहां आवेदन निर्धारिती द्वारा किया जाता है 90ख[दो सौ रुपए] की फीस के साथ, अपील अधिकरण से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसे आदेश90ग से पैदा होने वाले किसी विधि के प्रश्न का निर्देश उच्च न्यायालय को करे और इस धारा में अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, अपील अधिकरण ऐसे आवेदन की प्राप्ति के एक सौ बीस दिन के भीतर मामले का कथन तैयार करेगा और उसे उच्च न्यायालय को निर्दिष्ट करेगा :

परन्तु यदि अपील अधिकरण का समाधान हो जाता है कि आवेदक आवेदन को इसमें इससे पूर्व बतार्इ गर्इ अवधि के भीतर प्रस्तुत करने से पर्याप्त कारण से निवारित हो गया था तो वह उसे अधिक से अधिक तीस दिन की अतिरिक्त अवधि के भीतर पेश करने की अनुज्ञा दे सकेगा।

(2) यदि उपधारा (1) के अधीन किए गए आवेदन पर अपील अधिकरण इस आधार पर मामले का कथन तैयार करने से इनकार करता है कि कोर्इ विधि का प्रश्न90ग उत्पन्न नहीं हुआ है तो यथास्थिति, निर्धारिती या 90गग[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त,  उस तारीख से छह मास के भीतर जिसको ऐसे इनकार की सूचना की तामील उस पर होती है, उच्च न्यायालय को आवेदन कर सकेगा और यदि अपील अधिकरण के विनिश्चय के सही होने के संबंध में उच्च न्यायालय का समाधान नहीं हुआ है तो वह अपील अधिकरण से उस मामले का कथन तैयार करने की और उसे निर्दिष्ट करने की अपेक्षा कर सकेगा और ऐसी किसी अध्यपेक्षा की प्राप्ति पर अपील अधिकरण तदनुसार मामले का कथन तैयार करेगा और उसे निर्दिष्ट करेगा।

90घ[(2क) उच्च न्यायालय, उपधारा (2) में निर्दिष्ट छह मास की अवधि की समाप्ति के पश्चात् किसी आवेदन को ग्रहण कर सकेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि उस अवधि के भीतर उसे फाइल न करने का पर्याप्त कारण था।]

(3) जहां अपील अधिकरण उपधारा (2) के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग में किसी ऐसे मामले का कथन करने से इनकार करता है जिसका कथन करने की निर्धारिती द्वारा उससे अपेक्षा की गर्इ है, वहां निर्धारिती उस तारीख से जिसको वह ऐसे इनकार की सूचना प्राप्त करता है, तीस दिन के भीतर अपना आवेदन वापस ले सकेगा और यदि वह ऐसा करता है, तो संदत्त की गर्इ फीस वापस कर दी जाएगी।

 

89.  राष्ट्रीय कर अधिकरण अधिनियम, 2005 द्वारा “ग-उच्च न्यायालय को निर्देश”  तथा धारा 256 का, इसके अधिसूचित किए जाने की तारीख से लोप किया जाएगा।

90.  उच्च न्यायालय का निर्देश के प्ररूप के लिए नियम 48 और प्ररूप सं. 37 देखिए।

90क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2013 से अंत:स्थापित।

90कक. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से अंत:स्थापित।

90ख. वित्त अधिनियम, 1981 द्वारा 1.6.1981 से “एक सौ पच्चीस रुपए” के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से “एक सौ रुपए” शब्दों के स्थान पर “एक सौ पच्चीस रुपए” शब्द रखे गए थे।

90ग. ‘‘प्रश्न’’, ‘‘विधि के प्रश्न’’ और ‘‘ऐसे आदेश से पैदा होने वाले विधि के प्रश्न’’ पदों के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।

90गग.  वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2013 से अंत:स्थापित।

90घ. वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.1981 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]

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