अपीलीय आदेश
अध्याय 20
अपीलें और पुनरीक्षण
क–उपायुक्त (अपील) और आयुक्त (अपील) को अपीलें
अपीलीय आदेश
246. (1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए कोर्इ निर्धारिती, जो (उपायुक्त से भिन्न) निर्धारण अधिकारी के निम्नलिखित किसी आदेश से व्यथित है, ऐसे आदेश के विरुद्ध उपायुक्त (अपील) को 1 जून, 2000 के पूर्व अपील कर सकेगा–
(क) निर्धारिती के विरुद्ध आदेश, जहां निर्धारिती इस अधिनियम के अधीन निर्धारित किए जाने के अपने दायित्व से इंकार करता है, या धारा 143 की उपधारा (1) या उपधारा (1ख) के अधीन किसी संसूचना, जहां निर्धारिती समायोजन किए जाने पर आपत्ति करता है या धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 144 के अधीन निर्धारण का कोर्इ आदेश जहां निर्धारिती, निर्धारित आय की रकम या अवधारित कर की रकम या संगणित हानि की रकम या ऐसी प्रास्थिति, जिसके अधीन, उसका निर्धारण किया गया है, पर आपत्ति करता है;
(ख) धारा 147 या धारा 150 के अधीन निर्धारण, पुन: निर्धारण या पुन: संगणना का आदेश;
(ग) धारा 154 या धारा 155 के अधीन ऐसा आदेश, जिसका निर्धारण में वृद्धि करने, या रिफंड में कमी करने का प्रभाव है, या ऐसा आदेश जिसके द्वारा उक्त धाराओं में से किसी के अधीन निर्धारिती द्वारा किए गए दावे को मंजूर करने से इंकार किया गया है;
(घ) धारा 163 के अधीन किया गया कोर्इ ऐसा आदेश जिसमें निर्धारिती को अनिवासी के अभिकर्ता के रूप में माना गया है;
(ड़) धारा 170 की उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन आदेश;
(च) धारा 171 के अधीन आदेश;
(छ) 1 अप्रैल, 1992 को या उसके पूर्व प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए किसी निर्धारण की बाबत धारा 185 की उपधारा (1) काखंड (ख) के अधीन या उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (5) के अधीन आदेश;
(ज) 1 अप्रैल, 1992 को या उसके पूर्व प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए किसी निर्धारण की बाबत धारा 186 की उपधारा (1) के अधीन या उपधारा (2) के अधीन फर्म या रजिस्ट्रीकरण रद्द करने संबंधी आदेश;
(झ) धारा 201 के अधीन आदेश;
(ञ) 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पहले के निर्धारण वर्ष के लिए किसी निर्धारण की बाबत धारा 216 के अधीन आदेश;
(ट) धारा 237 के अधीन आदेश;
(ठ) कोर्इ ऐसा आदेश जिसमें–
(i) धारा 221, या
(ii) धारा 271, धारा 271क, धारा 271ख, धारा 272क, 272कक, या धारा 272खख;
(iii) 1 अप्रैल, 1988 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष या किन्हीं पहले के निर्धारण वर्षों के लिए किसी निर्धारण की बाबत धारा 272, धारा 272ख या धारा 273 जैसे कि वे 1 अप्रैल, 1989 के ठीक पूर्व विद्यमान थीं।
(1क) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, 1 अक्तूबर, 1998 को या उसके पश्चात् किन्तु 1 जून, 2000 से पूर्व उपायुक्त (अपील) के समक्ष फाइल की गर्इ प्रत्येक अपील और ऐसी अपील से उत्पन्न होने वाला या उससे संबंधित कोर्इ मामला जो इस प्रकार लंबित है, आयुक्त (अपील) को अंतरित माना जाएगा और आयुक्त (अपील) ऐसी अपील या मामले के संबंध में उस प्रक्रम से आगे कार्यवाही कर सकेगा जिस प्रक्रम पर वह उस दिन था।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी कोर्इ निर्धारिती, जो निम्नलिखित आदेशों में से किसी से (चाहे आदेश नियत दिन के पूर्व किया गया हो या उसके पश्चात्) व्यथित है, ऐसे आदेश के विरुद्ध आयुक्त (अपील) को 1 जून, 2000 से पूर्व अपील कर सकेगा–
(क) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट संसूचना या आदेश, जहां ऐसी संसूचना भेजी जाती है या ऐसा आदेश धारा 120 या धारा 124 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए या सौंपे गए कृत्यों का पालन करते हुए उपायुक्त द्वारा किया जाता है;
(ख) उपधारा (1) के खंड (क)से खंड (ड़)(दोनों सहित) और खंड (झ)से खंड (ठ) (दोनों सहित) में विनिर्दिष्ट ऐसा आदेश या 1 अप्रैल, 1987 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पहले के निर्धारण वर्ष के किसी निर्धारण की बाबत धारा 104 के अधीन, जैसी वह 1 अप्रैल, 1988 के ठीक पूर्व विद्यमान थी, ऐसा कोर्इ आदेश जो ऐसे निर्धारिती के, जो कंपनी है, विरुद्ध किया जाता है;
(ग) धारा 144क के अधीन उपायुक्त द्वारा जारी किए गए निदेशों के आधार पर 30 सितम्बर, 1984 के पश्चात् किया गया निर्धारण आदेश;
(घ) धारा 154 के अधीन उपायुक्त द्वारा किया गया आदेश;
(घक) 1 जनवरी, 1997 को या उसके पश्चात् धारा 132 के अधीन आरंभ की गर्इ तलाशी या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षित लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों या किन्हीं आस्तियों की बाबत, धारा 158खग के खंड (ग) के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा किया गया निर्धारण आदेश;
(घख) धारा 158खचक की उपधारा (2) के अधीन शास्ति अधिरोपित करने संबंधी आदेश;
(ड़) धारा 271ख या धारा 271खख के अधीन शास्ति अधिरोपित संबंधी आदेश;
(ड़ड़) धारा 271ग, धारा 271घ या धारा 271ड़ के अधीन शास्ति अधिरोपित संबंधी उपायुक्त द्वारा किया गया आदेश;
(च) धारा 272क के अधीन शास्ति अधिरोपित संबंधी उपायुक्त या उप निदेशक द्वारा किया गया आदेश;
(चच) धारा 272कक के अधीन शास्ति अधिरोपित संबंधी उपायुक्त द्वारा किया गया आदेश;
(छ) अध्याय 21 के अधीन शास्ति अधिरोपित संबंधी आय-कर अधिकारी या सहायक आयुक्त का आदेश, जहां ऐसी शास्ति धारा 274 की उपधारा (2) के अधीन उपायुक्त के पूर्व अनुमोदन से अधिरोपित की गर्इ है;
(ज) ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्गों की दशा में, जो बोर्ड, मामलों की प्रकृति, जटिलताओं और अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए, निदेश दे, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन (उपायुक्त से भिन्न) निर्धारण अधिकारी द्वारा किया गया आदेश।
(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड या प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक या प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त यदि वह बोर्ड द्वारा इस प्रकार प्राधिकृत किया जाए, लिखित आदेश द्वारा, ऐसी किसी अपील को जो उपायुक्त (अपील) के समक्ष लंबित है, और ऐसी अपील से उद्भूत होने वाले या उससे संबंधित किसी मामले को, जो इस प्रकार लंबित है, आयुक्त (अपील) को अंतरित कर सकेगा, यदि यथास्थिति, बोर्ड या प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक या प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त का (अपीलाथ्र्ाी के अनुरोध पर या अन्यथा) यह समाधान हो जाता है कि मामले की प्रकृति, जटिलताओं और अन्य बातों को ध्यान में रखते हुए, ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है और आयुक्त (अपील) ऐसी अपील या मामले में उस प्रक्रम से आगे कार्यवाही कर सकेगा जिस प्रक्रम पर वह उस समय था, जब उसे इस प्रकार अंतरित किया गया था :
परन्तु अपीलाथ्र्ाी यह मांग कर सकेगा कि ऐसी अपील या मामले में आगे कार्यवाही करने के पूर्व, पूर्व कार्यवाही या उसके किसी भाग पर नए सिरे पर विचार किया जाए या उसकी फिर से सुनवार्इ की जाए।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(क) ''नियत दिन'' से 10 जुलार्इ, 1978 अभिप्रेत है, जो वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 (1977 का 29) की धारा 39 के अधीन नियत किया गया दिन है;
(ख) ''प्रास्थिति'' से वह प्रवर्ग अभिप्रेत है, जिसके अंतर्गत निर्धारिती का निर्धारण "व्यष्टि", ''हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब'' आदि के रूप में किया जाता है।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

