आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 245ग

मामलों के समझौते के लिए आवेदन

धारा

धारा संख्या

245ग

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIX-क - मामले के निपटारे

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2024 (सं.1)

मामलों के समझौते के लिए आवेदन

मामलों के समझौते के लिए आवेदन

245ग. (1) कोई भी निर्धारिती, अपने से संबंधित मामले के किसी भी प्रक्रम पर, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से जो विहित की जाए, कोई ऐसा आवेदन, जिसमें उसकी ऐसी आय का, जो निर्धारण अधिकारी के समक्ष प्रकट नहीं की गई, पूरा और सच्चा प्रकटन है, ऐसी रीति जिससे ऐसी आय प्राप्त हुई है, ऐसी आय पर संदेय आय-कर की अतिरिक्त रकम और ऐसी अन्य विशिष्टियां जो विहित की जाएं दी हों, समझौता आयोग को मामले का समझौता करने के लिए कर सकेगा और ऐसा आवेदन इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति से निपटाया जाएगा :

परंतु ऐसा कोई आवेदन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक,–

(i) उस दशा में, जहां धारा 153क या धारा 153ग में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति के मामले में धारा 153क की उपधारा (1) के खंड (ख) या धारा 153ख की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट निर्धारण वर्षों में से किसी के लिए निर्धारण या पुनर्निर्धारण की कार्यवाहियां आरंभ कर दी गई हैं, वहां आवेदन में प्रकट की गई आय पर संदेय आय-कर की अतिरिक्त रकम पचास लाख रुपए से अधिक न हो;

(iक) ऐसे किसी मामले में, जहां,-

(अ) आवेदक खंड (i) में निर्दिष्ट उस व्यक्ति का नातेदार है, जिसनें आवेदन फाइल किया है (जिसे इस उपधारा में इसके पश्चात् "विनिर्दिष्ट व्यक्ति" कहा गया है) ; और

(आ) धारा 153क की उपधारा (1) के खंड (ख) या धारा 153ख की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट निर्धारण वर्षों में से किसी निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारण या पुनःनिर्धारण की कार्यवाहियां ऐसे आवेदक की दशा में, जो धारा 153क या धारा 153ग में निर्दिष्ट व्यक्ति है, आरंभ कर दी गई हैं,

वहां आवेदन में प्रकट की गई आय पर संदेय आय-कर की अतिरिक्त रकम दस लाख रुपए से अधिक नहीं है;

(ii) किसी अन्य दशा में, आवेदन में प्रकट की गई आय पर संदेय आय-कर की अतिरिक्त रकम दस लाख रुपए से अधिक न हो,

और ऐसे कर और उस पर ब्याज का, जिसका कि इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन संदाय कर दिया गया होता, यदि आवेदन में प्रकट की गई आय को आवेदन की तारीख को निर्धारण अधिकारी के समक्ष आय की विवरणी में घोषित कर दिया जाता आवेदन करने की तारीख को या उसके पूर्व संदाय कर दिया गया है और ऐसे संदाय का सबूत आवेदन के साथ संलग्न किया गया है।

स्पष्टीकरण :- खंड (iक) के प्रयोजनों के लिए,-

(क) आवेदक से खंड (iक) में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट व्यक्ति के संबंध में निम्नलिखित अभिप्रेत है,-

(i) जहां विनिर्दिष्ट व्यक्ति कोई व्यष्टि है, वहां विनिर्दिष्ट व्यक्ति का कोई नातेदार ;

(ii) जहां विनिर्दिष्ट व्यक्ति कोई कंपनी, फर्म, व्यक्ति-संगम या हिंदू अविभक्त कुटुंब है, वहां कंपनी का कोई निदेशक, फर्म का भागीदार, या संगम या कुटुंब का कोई सदस्य या ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य का कोई नातेदार ;

(iii) कोई ऐसा व्यष्टि, जिसका विनिर्दिष्ट व्यक्ति के कारबार या वृत्ति में कोई सारवान् हित है या ऐसे व्यष्टि का कोई नातेदार ;

(iv) ऐसी कोई कंपनी, फर्म, व्यक्ति-संगम या हिंदू अविभक्त कुटुंब, जिसका विनिर्दिष्ट व्यक्ति के कारबार या वृत्ति में कोई सारवान् हित है, या ऐसी कंपनी, फर्म, संगम का कोई निदेशक, भागीदार या कुटुंब का कोई सदस्य या ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य का कोई नातेदार ;

(v) कोई कंपनी, फर्म, व्यक्ति-संगम या हिंदू अविभक्त कुटुंब, जिसका यथास्थिति, किसी निदेशक, भागीदार या सदस्य का विनिर्दिष्ट व्यक्ति के कारबार या वृत्ति में सारवान् हित है या ऐसी कंपनी, फर्म, संगम का कोई निदेशक, भागीदार या कुटुंब का सदस्य या ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य का नातेदार ;

(vi) ऐसा कोई व्यक्ति, जो कोई कारबार या वृत्ति करता है, -

(अ) जहां विनिर्दिष्ट व्यक्ति का, जो व्यष्टि है या ऐसे विनिर्दिष्ट व्यक्ति के किसी नातेदार का, उस व्यक्ति के कारबार या वृत्ति में कोई सारवान् हित है ; या

(आ) जहां विनिर्दिष्ट व्यक्ति कोई कंपनी, फर्म, व्यक्ति-संगम या हिंदू अविभक्त कुटुंब या ऐसी कंपनी के किसी निदेशक, ऐसी फर्म के भागीदार, या संगम अथवा कुटुंब के सदस्य या ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य के किसी नातेदार का उस व्यक्ति के कारबार या वृत्ति में कोई सारवान् हित है ;

(ख) किसी व्यक्ति के बारे में यह समझा जाएगा कि उसका किसी कारबार या वृत्ति में कोई सारवान् हित है, यदि, -

(अ) ऐसे मामले में, जहां कारबार या वृत्ति किसी कंपनी द्वारा की जाती है, वहां ऐसा व्यक्ति तलाशी की तारीख को ऐसे शेयरों का (जो ऐसे शेयर नहीं हैं जो लाभांश की नियत दर के हकदार हों चाहे लाभों में हिस्सा पाने के अधिकार सहित या उसके बिना) जिनकी मतदान शक्ति बीस प्रतिशत से कम नहीं है हिताधिकारी स्वामी है ; और

(आ) किसी अन्य मामले में, ऐसा व्यक्ति तलाशी की तारीख को ऐसे कारबार या वृत्ति के लाभों के बीस प्रतिशत से अन्यून का फायदाप्रद रुप से हकदार है।

(1क) इस धारा की उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, इस धारा की उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आवेदन में प्रकट की गई आय की बाबत संदेय आय-कर की अतिरिक्त रकम उपधारा (1ख) से उपधारा (1घ) के उपबंधों के अनुसार संगणित रकम होगी।

(1ख) जहां आवेदन में प्रकट की गई आय केवल एक पूर्ववर्ष से संबंधित है, वहां,–

(i) यदि आवेदक ने उस वर्ष की कुल आय की बाबत कोई विवरणी नहीं दी है तो कर की संगणना आवेदन में प्रकट की गई रकम पर इस प्रकार की जाएगी मानो ऐसी आय कुल आय हो;

(ii) यदि आवेदक ने उस वर्ष की कुल आय की बाबत कोई विवरणी दे दी है तो विवरणी में दी गई कुल आय और आवेदन में प्रकट की गई आय के योग पर कर की संगणना इस प्रकार की जाएगी मानो ऐसा योग कुल आय हो।

(1ग) उपधारा (1ख) में निर्दिष्ट पूर्ववर्ष के संबंध में आवेदन से प्रकट की गई आय की बाबत संदेय आय-कर की अतिरिक्त रकम–

(क) उस उपधारा के खंड (i) में उल्लिखित मामले में, उस खंड के अधीन संगणित कर की रकम होगी;

(ख) उस उपधारा के खंड (ii) में उल्लिखित मामले में, इस खंड के अधीन संगणित कर की ऐसी रकम होगी जिसमें से उस वर्ष के लिए विवरणी में उल्लिखित कुल आय पर संगणित कर की रकम घटा दी जाएगी;

(ग) [***]

(1घ) जहां आवेदन में प्रकट की गई आय एक से अधिक पूर्ववर्षों से संबंधित है वहां प्रत्येक वर्ष के लिए प्रकट की गई आय की बाबत संदेय आय-कर की अतिरिक्त रकम की संगणना पहले उपधारा (1ख) और उपधारा (1ग) के उपबंधों के अनुसार की जाएगी और ऐसे प्रत्येक वर्ष की बाबत, जिसके लिए उपधारा (1) के अधीन आवेदन किया गया है, इस प्रकार निकाली गई रकम का योग आवेदन में प्रकट की गई आय की बाबत संदेय आय-कर की अतिरिक्त रकम होगा।

(1ड़) [***]

(2) उपधारा (1) के अधीन किए गए प्रत्येक आवेदन के साथ ऐसी फीस दी जाएगी जो विहित की जाए।

(3) आवेदक को उपधारा (1) के अधीन किया गया आवेदन वापस लेने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगा।

(4) निर्धारिती, उस तारीख को, जिसको वह समझौता आयोग को उपधारा (1) के अधीन आवेदन करता है, निर्धारण अधिकारी को, समझौता आयोग को ऐसा आवेदन किए जाने की विहित रीति में सूचना भी देगा।

1[(5) इस धारा के अधीन 1 फरवरी, 2021 को या उसके पश्चात् कोई आवेदन नहीं किया जाएगा।]

 

1. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा भुतलक्षी प्रभाव से 1.2.2021 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

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