आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 245ग

मामलों के निपटारे के लिए आवेदन

धारा

धारा संख्या

245ग

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIX-क - मामले के निपटारे

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

1992

मामलों के निपटारे के लिए आवेदन

मामलों के निपटारे के लिए आवेदन
मामलों के निपटारे के लिए आवेदन.
40 245C. 41 [(1) एक निर्धारिती, उसे करने के लिए संबंधित एक मामले की किसी भी स्तर पर निर्धारित किया जा सकता है के रूप में इस तरह के रूप में और इस तरह के तरीके में एक आवेदन पत्र बनाने, और पहले से खुलासा नहीं किया गया है जो अपनी आय का एक पूर्ण और सच्चा प्रकटीकरण युक्त हो सकता है 42 [आकलन] अधिकारी, ऐसी आय प्राप्त किया गया है जिस तरीके से इस तरह के आय और ऐसे अन्य ब्यौरे पर देय आयकर की अतिरिक्त राशि के मामले में किसी भी तरह के आवेदन का निपटारा किया है और निपटान आयोग को निर्धारित किया जा सकता चलकर प्रदान की ढंग से निपटाया जाएगा:
43 [ऐसी कोई आवेदन किया जाएगा, बशर्ते कि जब तक -
(क) निर्धारिती वह है जो आयकर रिटर्न सुसज्जित किया गया है या इस अधिनियम के प्रावधानों के किसी अंतर्गत प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक था; और
(ख) आवेदन में बताया आय पर देय आयकर की अतिरिक्त राशि पचास हजार रुपये से अधिक है.]
उप - धारा (1) इस खंड और उप वर्गों (2) की धारा 245D, के तहत किए गए एक आवेदन में खुलासा आय के संबंध में देय आयकर की अतिरिक्त राशि की (2 डी) करने के प्रयोजनों के लिए (1 ए) उप - धारा (1) इस धारा (1 डी) के लिए उप वर्गों (1 बी) के प्रावधानों के अनुसार गणना की राशि दी जाएगी.
44 [(1 बी) के आवेदन में बताया आय, केवल एक ही पिछले वर्ष से संबंधित है कहां -
आवेदक कि वर्ष की कुल आय (एक आकलन है कि वर्ष की कुल आय के संबंध में किया गया है या नहीं) के संबंध में एक वापसी सुसज्जित नहीं किया है (मैं), तो, एक मामले में छोड़कर खंड (द्वारा कवर III), कर ऐसी आय कुल आय के रूप में अगर आवेदन में बताया आय पर गणना की जाएगी;
आवेदक कि वर्ष की कुल आय (एक आकलन ऐसी वापसी के अनुसरण में किया गया है या नहीं) के संबंध में एक वापसी सुसज्जित किया गया है अगर (द्वितीय), कर लौटे कुल आय की कुल और आय पर गणना की जाएगी इस तरह के कुल कुल आय के रूप में अगर आवेदन में बताया;
(Iii) आयकर प्राधिकरण के समक्ष लंबित कार्यवाही अनुभाग 147 के तहत या इस तरह के पुनर्मूल्यांकन के सिलसिले में अपील या पुनरीक्षण के माध्यम से आवेदक के पुनर्मूल्यांकन के लिए एक कार्यवाही की प्रकृति में है, और आवेदक में एक वापसी सुसज्जित नहीं किया गया है धारा 143 या धारा 144 या धारा 147 और खुलासा आय के तहत मूल्यांकन के लिए पहले कार्यवाही में मूल्यांकन के रूप में पुनर्मूल्यांकन के लिए इस तरह की कार्यवाही के पाठ्यक्रम में उस वर्ष की कुल आय का सम्मान, कर कुल आय का कुल पर गणना की जाएगी इस तरह के कुल कुल आय के रूप में अगर आवेदन.]
45 [1 सी) पिछले वर्ष से संबंधित आवेदन उपधारा में निर्दिष्ट में खुलासा आय के संबंध में देय आयकर की अतिरिक्त राशि (1 बी), किया जाएगा -
(एक) एक मामले में है कि उप - धारा, कि खंड के अधीन की गणना कर की राशि के खंड (क) में निर्दिष्ट;
(ख) एक मामले में है कि उप - धारा, कुल आय में उस वर्ष के लिए लौट आए पर गणना कर की राशि से कम के रूप में उस धारा के तहत की गणना कर की राशि के खंड (ख) में निर्दिष्ट;
(ग) एक मामले में उस उपधारा के खंड (ग) में निर्दिष्ट, धारा 143 या के तहत मूल्यांकन के लिए पहले कार्यवाही में मूल्यांकन कुल आय पर गणना कर की राशि से कम के रूप में उस धारा के तहत की गणना कर की राशि धारा 144 या धारा 147.]
आवेदन में बताया आय एक से अधिक पिछले वर्ष से संबंधित है कहाँ (1 डी), वर्ष के प्रत्येक प्रथम उप वर्गों के प्रावधानों के अनुसार गणना की जाएगी लिए खुलासा आय के संबंध में देय आयकर की अतिरिक्त राशि (1 बी) और (1 सी) और आवेदन (1) के संबंध में देय आयकर की अतिरिक्त राशि होगी उपधारा के तहत किया गया है जिसके लिए इतने वर्षों प्रत्येक के संबंध में पर पहुंचे राशि की सकल आय आवेदन में बताया.
खाते, अन्य दस्तावेजों, धन, सर्राफा, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या एक निर्धारिती से संबंधित बात की किसी भी पुस्तक के खंड 132 के तहत जब्त कर रहे हैं कहाँ (1E), निर्धारिती उप - धारा के तहत एक आवेदन पत्र बनाने के लिए हकदार नहीं होगा (1) जब्ती की तारीख से एक सौ और बीस दिन की समाप्ति से पहले.]
(2) उप - धारा (1) के तहत किया गया प्रत्येक आवेदन निर्धारित हो सकता है के रूप में इस तरह के शुल्क के साथ किया जाएगा.
(3) उपधारा के अधीन किए गए एक आवेदन आवेदक द्वारा वापस लिया जा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
  

 

प्र 40 नियम 44c और फार्म सं 34B देखें.
प्र.41. अधिनियम, 1984 से प्रभावी कराधान कानून (संशोधन) (1) उप - धारा निम्नलिखित के लिए एवजी 1984/01/10:
                        "(1) एक निर्धारिती, उसे करने के लिए संबंधित एक मामले के किसी भी चरण में, इस तरह के रूप में और इस तरह के तरीके में एक आवेदन पत्र बनाने और मामले का निपटारा करने और किसी भी तरह के आवेदन करेगा है करने के लिए समझौता आयोग को निर्धारित किया जा सकता है के रूप में ऐसे विवरण सकता है उपबंधित रीति चलकर में निपटाया जा सकता है. "
प्र.42. प्रत्यक्ष कर कानून (संशोधन) अधिनियम, 1987, wef1-4-1988 तक "आयकर" के लिए एवजी.
प्र 43 वित्त अधिनियम, 1987 से प्रभावी द्वारा प्रतिस्थापित 1987/01/06. पहले अपने प्रतिस्थापन के लिए, परंतुक के तहत के रूप में खड़ा था:
"आवेदन में बताया आय पर देय आयकर की अतिरिक्त राशि पचास हजार रुपये से अधिक है, जब तक ऐसी कोई आवेदन किया जाएगा बशर्ते कि."
प्र.44. वित्त अधिनियम, 1987 से प्रभावी द्वारा प्रतिस्थापित 1987/01/06. : पहले अपने प्रतिस्थापन के लिए, उप - धारा (1 बी) के तहत के रूप में खड़ा
                        "(1 बी) के आवेदन में बताया आय, केवल एक ही पिछले वर्ष से संबंधित है कहां -
आवेदक कि वर्ष की कुल आय और कोई मूल्यांकन के संबंध में एक वापसी उस वर्ष की कुल आय के संबंध में किया गया है सुसज्जित नहीं किया है (मैं), कर के रूप में यदि आवेदन में बताया आय पर गणना की जाएगी ऐसे आय कुल आय थे;
आवेदक कि वर्ष की कुल आय और कोई मूल्यांकन के संबंध में एक वापसी सुसज्जित किया गया है अगर (ii) ऐसी वापसी के अनुसरण में किया गया है, कर लौटे कुल आय का कुल पर गणना की जाएगी और आय आवेदन में बताया इस तरह के कुल कुल आय के रूप में अगर; और
उस वर्ष की कुल आय के संबंध में एक आकलन किया गया है कि अगर (तीन), कर मूल्यांकन के रूप में कुल आय का समग्र और इस तरह के कुल कुल आय के रूप में अगर आवेदन में बताया आय पर गणना की जाएगी. "
प्र.45. वित्त अधिनियम, 1987 से प्रभावी द्वारा प्रतिस्थापित 1987/01/06. पहले अपने प्रतिस्थापन के लिए, उप - धारा (1 सी) के तहत के रूप में खड़ा था:
                        "(1 सी) उप - धारा (1) के तहत की गणना के रूप में कर कम किया जाएगा, -
(क) योग द्वारा, उप - धारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट एक मामले में, यदि कोई हो, अध्याय XVII बी के तहत स्रोत पर काटा गया या अध्याय XVII सी के तहत अग्रिम भुगतान;
(ख) के मामले में खंड 140A के तहत आवेदक द्वारा भुगतान किया, यदि कोई हो, खंड (क) और टैक्स में निर्दिष्ट रकम की कुल द्वारा, उप - धारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट; और
(Iii) खंड में निर्दिष्ट एक मामले में (ग) किसी भी अगर खंड में निर्दिष्ट रकम और टैक्स की कुल द्वारा उप - धारा (1) (बी) के आकलन के अनुसरण में भुगतान, कर की वृद्धि के रूप में की उस वर्ष की कुल आय के संबंध में की गई,
                        और इतने पर पहुंचे उसके एवज में राशि उस वर्ष से संबंधित आवेदन में बताया आय के संबंध में देय आयकर की अतिरिक्त राशि दी जाएगी. "
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