आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 2

आयकर

धारा

धारा संख्या

2

अध्याय शीर्षक

अधिनियम

वित्त अधिनियम

वर्ष

1977

आयकर

आयकर

अध्याय- II

आयकर की दरों

आयकर

.20. उप वर्गों के प्रावधानों को (1) के अधीन (2) और (3), अप्रैल, 1977 के 1 दिन शुरू निर्धारण वर्ष के लिए आयकर प्रथम अनुसूची के भाग में विनिर्दिष्ट दरों पर चार्ज किया जाएगा और, वृद्धि की जाएगी -

(क) के मामलों में जो करने के लिए उस भाग के पैराग्राफ ए, बी, सी और डी संघ के प्रयोजनों के लिए एक अधिभार से, लागू; और

(ख) के मामलों में जो अनुच्छेद उस भाग की ई, एक अधिभार से लागू होता है, के लिए

उसमें उपबंधित रीति से प्रत्येक मामले में गणना:

एक निर्धारिती, एक कंपनी जा रहा है, अप्रैल, 1976 के 1 दिन शुरू वित्तीय वर्ष के दौरान बनाया गया है, जहां है, बशर्ते कि भारत के कानून के औद्योगिक विकास बैंक, 1964 (18 के तहत स्थापित भारतीय औद्योगिक विकास बैंक के साथ किसी भी जमा 1964) आयकर) योजना, 1976 को कंपनियों जमाओं (अधिभार के तहत, फिर, कंपनी द्वारा देय आयकर पर अधिभार, -

(क) इसलिए बनाया जमा की गई राशि के बराबर है या आयकर यह द्वारा देय, शून्य हो जाएगा पर अधिभार की राशि से अधिक है, जहां एक मामले में, और

(ख) इसलिए बनाया जमा की राशि यह द्वारा देय आयकर पर अधिभार की राशि का कम हो जाता है, जहां एक मामले में, जमा की गई राशि से कम हो जाएगा.

(2) मामलों में जो करने के लिए उप पैरा मैं या निर्धारिती है जहां पहली अनुसूची के भाग मैं लागू होता है, के पैरा एक के उप पैरा द्वितीय, पिछले वर्ष में, किसी भी शुद्ध कृषि आय, कुल आय के अलावा, और कुल आय आठ हजार रुपए से अधिक है, तब -

नेट सांस्कृतिक कृषि आय कुल के पहले आठ हजार रुपए के बाद कुल आय में शामिल किया गया है जैसे कि (क) शुद्ध कृषि आय खंड (ख) में उपबंधित रीति से, ध्यान में रखा जाना होगा (जो कहना है, आय लेकिन कर के लिए उत्तरदायी होने के बिना), केवल कुल आय के संबंध में आयकर चार्ज के प्रयोजन के लिए; और

के रूप में निम्नानुसार (ख) आयकर प्रभार्य गणना की जाएगी: -

(I) कुल आय और शुद्ध कृषि आय एकत्रित किया जाएगा और आयकर की राशि उप पैरा में निर्दिष्ट दरों पर कुल आय के संबंध में निर्धारित किया जाएगा मैं या, जैसा भी मामला हो, उप पैरा कहा पैरा एक का द्वितीय, ऐसे कुल आय कुल आय के रूप में अगर;

(Ii) शुद्ध कृषि आय आठ हजार रुपए की राशि की वृद्धि की जाएगी और इसलिए उप पैरा मैं में निर्दिष्ट दरों पर वृद्धि हुई है या, के रूप में के रूप में आयकर की राशि शुद्ध कृषि आय के संबंध में निर्धारित किया जाएगा के रूप में इतनी वृद्धि हुई नेट कृषि आय कुल आय के रूप में अगर मामला है, ने कहा कि पैरा एक का, उप पैरा द्वितीय हो सकता है;

(Iii) आयकर उपखंड (i) के अनुसार निर्धारित राशि है जिसके द्वारा उपखंड (ii) कुल आय के संबंध में आयकर प्रभार्य होगी के अनुसार निर्धारित आयकर की राशि से अधिक है .

(3) ऐसे मामलों में जो करने के लिए अध्याय बारहवीं या आयकर अधिनियम की धारा 164 के प्रावधानों, 1961 (1961 का 43) को लागू करने (बाद में आयकर अधिनियम के रूप में), कर प्रभार्य में प्रदान के रूप में निर्धारित किया जाएगा उस अध्याय या उस अनुभाग, और जैसा भी मामला हो, उस अध्याय या खंड में निर्दिष्ट के रूप में उपधारा (1) या दरों से लगाया दरों के संदर्भ में.

(4) कर वर्गों 193 के तहत कटौती की जानी है जिसमें मामलों में, 194, 194A, 194B, 194D और बल में दरों पर आयकर अधिनियम की 195, कटौती के भाग द्वितीय में निर्दिष्ट दरों पर की जाएगी प्रथम अनुसूची.

(5) आयकर (5) आयकर अधिनियम की धारा 132 की उपधारा के लिए सबसे पहले परंतुक के तहत की गणना या उप के तहत आरोप लगाए जाने की है जिसमें उप - धारा (6), आईआर मामलों के प्रावधानों के अधीन खंड 172 या उप - धारा की उपधारा (4) (2) धारा 174 या उक्त अधिनियम की धारा 176 की धारा 175 या उपधारा (2) के या सिर "वेतन के तहत आय प्रभार्य से उक्त अधिनियम की धारा 192 के तहत कटौती की "या (9) ने कहा कि उपधारा में निर्दिष्ट किसी भुगतान से उक्त अधिनियम की धारा 80 ई के उप - धारा के तहत कटौती की (9) या जिसमें कहा" अधिनियम के अध्याय XVII सी के तहत देय एडवांस टैक्स "है बल, ऐसे आयकर या, जैसा भी मामला हो, "अग्रिम कर" में, दर या दरों पर गणना की जानी करने के लिए इसलिए, आरोप लगाया है या काट के भाग III में निर्दिष्ट दर या दरों पर गणना, गणना की जाएगी प्रथम अनुसूची:

मामलों में जो करने के लिए अध्याय बारहवीं या आयकर अधिनियम की धारा 164 के प्रावधानों को लागू करने, बशर्ते कि "अग्रिम कर कि" अध्याय या खंड में निर्दिष्ट के रूप में इस उप - धारा या दरों से लगाया दरों के संदर्भ के साथ गणना की जाएगी , जैसा भी मामला हो सकता है.

(6) मामलों में जो उप पैरा मैं या पहली अनुसूची के भाग III के पैरा एक के उप पैरा द्वितीय आय के किसी भी प्रावधान के पुण्य से अगर, निर्धारिती है जहां पिछले एक साल में, लागू होता है, या टैक्स अधिनियम, आयकर पिछले वर्ष की तुलना में अन्य अवधि की आय के संबंध में आरोप लगाया जा रहा है, इस तरह के अन्य अवधि में कुल आय के अतिरिक्त किसी भी शुद्ध कृषि आय,, और कुल आय तो, दस हजार रुपये से अधिक है , उप - धारा को पहले परंतुक के तहत आयकर की गणना में (5) 'आयकर अधिनियम की धारा 132 के या (2) धारा 174 या धारा 175 या उप धारा (की उप - धारा के तहत आयकर चार्ज में 2) ने कहा कि अधिनियम की धारा 176 के या "एडवांस टैक्स" कंप्यूटिंग में उक्त अधिनियम के अध्याय XVII सी के तहत देय, बल में दर या दरों पर -

नेट कृषि आय कुल आय के पहले आठ हजार रुपए के बाद कुल आय में शामिल किया गया है जैसे कि (क) शुद्ध कृषि आय, कि कहने के लिए है (खंड (ख) में उपबंधित रीति से, खाते में रखा जाएगा लेकिन केवल जैसा भी मामला हो, या गणना चार्ज या ऐसे आयकर कंप्यूटिंग के प्रयोजन के लिए,) कर के लिए उत्तरदायी होने के बिना. कुल आय के संबंध में "कर अग्रिम"; और

(ख) ऐसे आयकर या, जैसा भी मामला हो, "अग्रिम कर" इसलिए, गणना चार्ज या इस प्रकार है के रूप में गणना की जाएगी: -

(I) कुल आय और शुद्ध कृषि आय एकत्रित किया जाएगा और आयकर या "एडवांस टैक्स" की राशि उप पैरा मैं में निर्दिष्ट दरों पर कुल आय के संबंध में निर्धारित किया जाएगा या मामले के रूप में हो सकता है इस तरह कुल आय कुल आय के रूप में अगर कहा पैरा एक का, उप पैरा द्वितीय, हो:

बशर्ते कि इस subclause के अनुसार आयकर या "एडवांस टैक्स" की राशि का निर्धारण करने के प्रयोजनों के लिए, उप पैरा मैं या, जैसा भी मामला हो, उप पैरा नीचे परंतुक के खंड (ख) के प्रावधानों कहा पैरा एक का द्वितीय और कहा उप पैराग्राफ में आयकर पर अधिभार से संबंधित प्रावधानों को लागू नहीं होगा;

(Ii) शुद्ध कृषि आय आठ हजार रुपए की राशि की वृद्धि की जाएगी और इसलिए उप पैरा में निर्दिष्ट दरों पर वृद्धि हुई के रूप में आयकर या "एडवांस टैक्स" की राशि शुद्ध कृषि आय के संबंध में निर्धारित किया जाएगा मैं या, के रूप में इतनी वृद्धि हुई नेट कृषि आय कुल आय के रूप में अगर मामला कहा पैरा एक का, उप पैरा द्वितीय, हो सकता है:

बशर्ते कि इस subclause के अनुसार आयकर या "एडवांस टैक्स" की राशि का निर्धारण करने के प्रयोजनों के लिए, नीचे परन्तुक के खण्ड (क) और खंड (ख) के प्रावधानों के उप पैरा मैं या, जैसा भी मामला हो सकता है कहा, पैरा एक के उप पैरा द्वितीय और कहा उप पैराग्राफ में आयकर पर अधिभार से संबंधित प्रावधानों को लागू नहीं होगा जा;

मामले के अनुसार निर्धारित, "अग्रिम कर" हो सकता है के रूप में (iii) आयकर या उपखंड (i) के अनुसार निर्धारित "एडवांस टैक्स" की राशि आयकर की राशि से कम या किया जाएगा उपखंड (ii):

इतने पर पहुंचे राशि कुल आय दस हजार रुपये से अधिक की राशि का सत्तर प्रतिशत से अधिक है, अतिरिक्त अवहेलना जाएगी;

(Iv) आयकर या उपखंड (एचआई) के अनुसार निर्धारित "एडवांस टैक्स" की राशि ऐसी आयकर या फीसदी पंद्रह की दर से गणना की संघ के प्रयोजनों के लिए एक अधिभार की वृद्धि की जाएगी, मामला हो सकता है, के रूप में कुल आय के संबंध में अग्रिम कर "" अग्रिम कर'' और राशि के मामले में, हो सकता है, इसलिए आयकर होगी पर पहुंचे या ".

(7) इस खंड और प्रथम अनुसूची के प्रयोजनों के लिए -

(क) "जनता में काफी रुचि रखते हैं, जिसमें कंपनी 'आयकर अधिनियम की धारा 108 में निर्दिष्ट है के रूप में एक ऐसी कंपनी है जो एक कंपनी;

(ख) "घरेलू कंपनी" एक भारतीय कंपनी, या, अप्रैल, 1977 के 1 दिन शुरू निर्धारण वर्ष के लिए आयकर अधिनियम के तहत आयकर करने के लिए उत्तरदायी इसकी आय के संबंध में, बनाया गया है जो किसी भी अन्य कंपनी का मतलब कि अधिनियम की धारा 194 के प्रावधानों के अनुसार ऐसे आय से बाहर देय (. वरीयता शेयरों पर लाभांश सहित) लाभांश की भारत के भीतर घोषणा और भुगतान के लिए निर्धारित व्यवस्था;

(ग) "औद्योगिक कंपनी" मुख्य रूप से पीढ़ी या बिजली या किसी भी अन्य शक्ति का रूप या जहाजों के निर्माण में या माल के निर्माण या संसाधन में या खनन में के वितरण के कारोबार में लगी हुई है जो एक कंपनी का मतलब है.

स्पष्टीकरण. के लिए इस खंड के प्रयोजनों के लिए, एक कंपनी मुख्य रूप से पीढ़ी के व्यापार या बिजली या बिजली के किसी अन्य रूप से वितरण में या जहाजों के निर्माण में या माल के निर्माण या संसाधन में या में लगे हुए किया जाना समझा जाएगा खनन, (आयकर अधिनियम के अध्याय वीआईए के तहत किसी भी कटौती करने से पहले अभिकलन के रूप में) पिछले वर्ष की कुल आय में शामिल उक्त गतिविधियों में से किसी एक या अधिक के कारण आय प्रतिशत से भी कम इक्यावन नहीं है अगर इस तरह कुल आय का;

(घ) "बीमा कमीशन" आयोग के माध्यम से किया जाए या नहीं तो, (निरंतरता, नवीकरण या बीमा की नीतियों के पुनरुद्धार से संबंधित व्यापार सहित) बीमा कारोबार याचना या खरीद के लिए, किसी भी पारिश्रमिक या इनाम का मतलब है;

(ई) "शुद्ध कृषि आय", एक व्यक्ति के संबंध में, पहली अनुसूची के भाग IV में निहित नियमों के अनुसार अभिकलन उस व्यक्ति की, व्युत्पन्न जो भी स्रोत से, कृषि आय की कुल राशि का मतलब है;

(च) "कर मुक्त सुरक्षा" या जारी आयकर मुक्त, या किसी भी सुरक्षा होने की घोषणा केन्द्र सरकार की किसी भी सुरक्षा का मतलब एक राज्य सरकार आयकर जिस पर राज्य सरकार द्वारा देय है, नि: शुल्क आयकर जारी ;

(छ) इस अनुभाग में या पहली अनुसूची में प्रयोग किया जाता है लेकिन इस उप - धारा में परिभाषित किया और आयकर अधिनियम में परिभाषित नहीं सभी दूसरे शब्दों और अभिव्यक्तियों कि अधिनियम में उन्हें सौंपा, क्रमशः, अर्थ होंगे.

 

 

[वित्त (नं. 2) अधिनियम, 1977]

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