आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 184

फर्म के रूप में निर्धारण

धारा

धारा संख्या

184

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVI - कंपनियों के लिए लागू विशेष प्रावधान

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2009

फर्म के रूप में निर्धारण

फर्म के रूप में निर्धारण

86[फर्म के रूप में निर्धारण

184. (1) फर्म का, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किसी फर्म के रूप में निर्धारण किया जाएगा, यदि–

(i) भागीदारी किसी लिखत87 द्वारा सािक्ष्यत है; और

(ii) भागीदार के व्यक्तिगत शेयर उस लिखत में विनिर्दिष्ट88 हैं।

(2) उपधारा (1) में उल्लिखित भागीदारी लिखत की एक प्रमाणित प्रति, 1 अप्रैल, 1993 को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष की, जिसके संबंध में किसी फर्म के रूप में निर्धारण पहली बार चाहा गया है, फर्म की आय की विवरणी के साथ होगी।

स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, भागीदारी लिखत की प्रति सभी भागीदारों द्वारा (जो अवयस्क नहीं है) या जहां विवरणी फर्म के विघटन के पश्चात् दी जाती है वहां ऐसे सभी व्यक्तियों द्वारा (जो अवयस्क नहीं है) जो फर्म के विघटन के ठीक पूर्व उसमें भागीदार थे और किसी ऐसे भागीदार के, जिसकी मृत्यु हो जाती है, विधिक प्रतिनिधि द्वारा लिखित रूप में प्रमाणित की जाएगी।

(3) जहां किसी फर्म का किसी निर्धारण वर्ष के लिए उस हैसियत में निर्धारण किया जाता है वहां उसका निर्धारण प्रत्येक पश्चात्वर्ती वर्ष के लिए उसी हैसियत में किया जाएगा, यदि ऐसी भागीदारी लिखत द्वारा सािक्ष्यत, जिसके आधार पर फर्म के रूप में निर्धारण पहली बार चाहा गया था, फर्म के गठन या भागीदारों के शेयरों में कोर्इ तब्दीली नहीं होती है।

(4) जहां पूर्ववर्ष में ऐसी कोर्इ तब्दीली हुर्इ है वहां फर्म ऐसे पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए आय की विवरणी के साथ पुनरीक्षित भागीदारी लिखत की एक प्रमाणित प्रति देगी और इस धारा के सभी उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

89[(5) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में किसी फर्म की ओर से ऐसी कोर्इ असफलता होती है जो धारा 144 में उल्लिखित है वहां उस फर्म का निर्धारण इस प्रकार किया जाएगा कि उसमें ब्याज, वेतन, बोनस, कमीशन या पारिश्रमिक के संदाय के रूप में, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, जो ऐसी फर्म द्वारा ऐसी फर्म के किसी भागीदार को किया गया हो, कोर्इ कटौती "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में अनुज्ञात नहीं की जाएगी और ऐसा ब्याज, वेतन, बोनस, कमीशन या पारिश्रमिक धारा 28 के खंड (v) के अधीन आय-कर के लिए प्रभार्य नहीं होगा।]

 

86. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से उपशीर्ष 'ख' और धारा 184, 185 और 186 के स्थान पर प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापन से पूर्व उपशीर्ष "ख" और धारा 184, 185 और 186 कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988/1.4.1989 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से और प्रत्यक्ष कर विधि (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से संशोधित की गयी थी।

87. "लिखत" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

88. "विनिर्दिष्ट" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

89. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (5) निम्नलिखित रूप में थी :

"(5) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में, किसी फर्म की ओर से कोर्इ ऐसी असफलता होती है, जो धारा 144 में उल्लिखित है वहां फर्म का उक्त निर्धारण वर्ष के लिए उस हैसियत में निर्धारण नहीं किया जाएगा और तब उस फर्म का निर्धारण उसी रीति से किया जाएगा जिस रीति से किसी व्यक्ति-संगम का निर्धारण किया जाता है और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।"

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

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