आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 17

अपील का अधिकार

धारा

धारा संख्या

17

अध्याय शीर्षक

III - सुरक्षा हित के प्रवर्तन

अधिनियम

प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण वित्तीय परिसंपत्तियों और प्रवर्तन सुरक्षा ब्याज अधिनियम, 2002

वर्ष

अपील का अधिकार

अपील का अधिकार

 अपील का अधिकार।

17.(1) कोई भी व्यक्ति (उधारकर्ता सहित), इस अध्याय के तहत सुरक्षित लेनदार या उसके अधिकृत अधिकारी द्वारा किए गए धारा 13 की उप-धारा (4) में निर्दिष्ट किसी भी उपाय से व्यथित है। जिस तारीख को ऐसा उपाय किया गया था, उससे पैंतालीस दिनों के भीतर मामले में अधिकार क्षेत्र वाले डेब्ट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल को [ऐसी फीस के साथ एक आवेदन बनाया जा सकता है, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है]:

[बशर्ते कि, आवेदन करने के लिए उधारकर्ता तथा उधारकर्ता के अतिरिक्त अन्य व्यक्ति के लिए भिन्न-भिन्न शुल्क निर्धारित किए जा सकते हैं।]

[ व्याख्या।- संदेह दूर करने के लिए, एतद्द्वारा यह घोषित किया जाता है कि सुरक्षित लेनदार द्वारा उधारकर्ता को उसके प्रतिनिधित्व या आपत्ति को स्वीकार नहीं करने या उधारकर्ता को कारणों के संचार के चरण में सुरक्षित लेनदार की संभावित कार्रवाई के कारणों की सूचना देना व्यक्ति (उधारकर्ता सहित) को इस उप-धारा के तहत ऋण वसूली न्यायाधिकरण को आवेदन बनाने का हकदार नहीं होगा।]

[(2) डेब्ट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल इस बात पर विचार करेगा कि क्या सुरक्षा को लागू करने के लिए सुरक्षित लेनदार द्वारा धारा 13 की उप-धारा (4) में निर्दिष्ट कोई भी उपाय इस अधिनियम के प्रावधानों और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार है।

(3) यदि, ऋण वसूली न्यायाधिकरण, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों और पक्षों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य की जांच करने के बाद, इस निष्कर्ष पर आता है कि धारा 13 की उप-धारा (4) में निर्दिष्ट कोई भी उपाय, सुरक्षित लेनदार द्वारा लिए गए इस अधिनियम के प्रावधानों और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार नहीं हैं, और उधारकर्ता को व्यवसाय के प्रबंधन की बहाली या उधारकर्ता को सुरक्षित संपत्ति के कब्जे की बहाली की आवश्यकता होती है, यह आदेश द्वारा हो सकता है, धारा 13 की उप-धारा (4) में निर्दिष्ट किसी भी एक या अधिक उपायों के लिए सुरक्षित लेनदारों द्वारा किए गए किसी भी उपाय को अमान्य घोषित करें और सुरक्षित संपत्ति के कब्जे को उधारकर्ता को पुनर्स्थापित करें या उधारकर्ता को व्यवसाय के प्रबंधन को पुनर्स्थापित करें, जैसा कि मामला हो सकता है, और ऐसा आदेश पारित करता है जिसे वह धारा 13 की उप-धारा (4) के तहत सुरक्षित लेनदार द्वारा लिए गए किसी भी उपाय के संबंध में उचित और आवश्यक समझे

(4) यदि, डेब्ट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल धारा 13 की उप-धारा (4) के तहत एक सुरक्षित लेनदार द्वारा उठाए गए उपाय की घोषणा करता है, यह इस अधिनियम के प्रावधानों और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार है, फिर, किसी भी अन्य कानून में निहित किसी भी चीज के बावजूद, जो अभी लागू है, सुरक्षित लेनदार अपने सुरक्षित ऋण की वसूली के लिए धारा 13 की उप-धारा (4) के तहत निर्दिष्ट उपायों में से एक या अधिक का सहारा लेने का हकदार होगा

(5) उप-धारा (1) के तहत बनाए गए किसी भी आवेदन पर डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल द्वारा जितनी जल्दी हो सके कार्रवाई की जाएगी और इस तरह के आवेदन: की तारीख से साठ दिनों के भीतर निपटान किया जाएगा

बशर्ते कि ऋण वसूली अधिकरण समय-समय पर, कारणों को लिखित रूप में दर्ज करते हुए, उक्त अवधि का विस्तार कर सकता है, किंतु ऐसा करते हुए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उप-धारा (1) के अंतर्गत की गई ऐसी आवेदन-पत्र की लंबित अवधि, ऋण वसूली अधिकरण के समक्ष, आवेदन की तिथि से चार माह से अधिक न हो।

(6) यदि उप-धारा (5) में निर्दिष्ट चार महीने की अवधि के भीतर ऋण वसूली न्यायाधिकरण द्वारा आवेदन का निपटान नहीं किया जाता है, आवेदन का कोई भी हिस्सा आवेदन बना सकता है, के रूप में निर्धारित किया जा सकता है, ऋण वसूली न्यायाधिकरण और अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित आवेदन के शीघ्र निपटान के लिए ऋण वसूली न्यायाधिकरण को निर्देश देने के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण को, इस तरह के आवेदन पर, ऋण वसूली न्यायाधिकरण द्वारा लंबित आवेदन के शीघ्र निपटान के लिए आदेश दें।

(7) इस अधिनियम में अन्यथा दिए गए प्रावधानों के अनुसार बचत करें, ऋण वसूली न्यायाधिकरण करेगा, जहाँ तक हो सकता है, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के कारण ऋणों की वसूली अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आवेदन का निपटान करना, 1993 (1993 का 51) और उसके तहत बनाए गए नियम।]


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