वेतन से कटौती
वेतन से कटौतियां
7316. ''वेतन'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना निम्नलिखित कटौतियां करने के पश्चात् की जाएगी, अर्थात् :—
74[(i) ऐसे निर्धारिती की दशा में जिसकी वेतन से आय, इस खंड के अधीन कटौती अनुज्ञात करने से पहले,—
(अ) एक लाख पचास हजार रुपए से अधिक नहीं है, वेतन के 331/3 प्रतिशत या तीस हजार रुपए, इनमें से जो भी कम हो, के बराबर राशि की कटौती;
(आ) एक लाख पचास हजार रुपए से अधिक है किन्तु तीन लाख रुपए से अधिक नहीं है, पच्चीस हजार रुपए की राशि की कटौती;
(इ) तीन लाख रुपए से अधिक है किंतु पांच लाख रुपए से अधिक नहीं है, बीस हजार रुपए की राशि की कटौती;75
(ii) नियोजक द्वारा निर्धारिती को जो सरकार से वेतन पाता है, विनिर्दिष्ट तौर पर दिए गए सत्कार भत्ते की प्रकृति के किसी भत्ते की बाबत कटौती उसके वेतन के (किसी भत्ता, फायदे या परिलब्धि को छोड़कर) पांचवें हिस्से के बराबर राशि या पांच हजार रुपए इनमें से जो भी कम हो;]
76[(iii) निर्धारिती द्वारा संविधान के अनुच्छेद 276 के खंड (2)77 के अर्थ में, नियोजन पर उस कर के मद्दे, जो किसी विधि द्वारा या उसके अधीन उद्ग्रहणीय है, संदत्त की गर्इ राशि की कटौती।]
(iv) 78[***]
(v) 79[***]
73. सुसंगत केस लाज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
74. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से खंड (i) और (ii) के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से तथा वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से यथा संशोधित खंड (i) और (ii) इस प्रकार थे :
"(i) ऐसे निर्धारिती की दशा में, जिसकी वेतन से आय, इस खंड के अधीन कटौती अनुज्ञात करने से पूर्व–
(क) एक लाख रुपए से अधिक नहीं है, वेतन का 331/3 प्रतिशत या पच्चीस हजार रुपए, इनमें से जो भी कम हो, के बराबर राशि की कटौती;
(ख) एक लाख रुपए से अधिक है, किन्तु पांच लाख रुपए से अधिक नहीं है, बीस हजार रुपए की राशि की कटौती।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, जहां किसी निर्धारिती की दशा में वेतन एक से अधिक नियोजकों से देय है या उनके द्वारा संदत्त या अनुज्ञात किया गया है वहां इस खंड के अधीन कटौती की संगणना निर्धारिती को देय, संदत्त या अनुज्ञात संकलित वेतन के प्रति निर्देश से की जाएगी और किसी भी दशा में वह इस खंड के अधीन विनिर्दिष्ट रकम से अधिक नहीं होगी;
(ii) निर्धारिती को उसके नियोजक द्वारा विनिर्दिष्ट रूप से दिए गए सत्कार भत्ते के प्रकार के किसी भत्ते के संबंध में कटौती–
(क) ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो सरकार से वेतन पाता है उसके वेतन के (किसी भत्ते, फायदे या अन्य परिलब्धि को छोड़कर), पांचवें हिस्से के बराबर राशि या पांच हजार रुपए, इनमें से जो भी कम हो; और
(ख) किसी अन्य ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो ऐसा सत्कार भत्ता प्राप्त करता है और 1 अप्रैल, 1955 के पूर्व की किसी तारीख से अपने वर्तमान नियोजक से ऐसा सत्कार भत्ता नियमित रूप से निरंतर प्राप्त करता रहा है, 1 अप्रैल, 1955 के पूर्व समाप्त होने वाले किसी पूर्ववर्ष में अपने वर्तमान नियोजक से निर्धारिती द्वारा नियमित रूप से प्राप्त ऐसे सत्कार भत्ते की रकम या उसके वेतन के (किसी भत्ते, फायदे या अन्य परिलब्धि को छोड़कर) पांचवें हिस्से के बराबर राशि या सात हजार पांच सौ रुपए, इनमें से जो भी सबसे कम हो;"
इससे पूर्व खंड (i) वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से, वित्त अधिनियम, 1981 द्वारा 1.4.1982 से, वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से, वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1984 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1975 से भूतलक्षी प्रभाव से, वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से, वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से, वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से, वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1990 से, वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से, वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1994 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से संशोधित किया गया और खंड (iii) वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से अंत:स्थापित किया गया था।
75. धारा 16 के पूर्ववर्ती खंड (i) के स्पष्टीकरण को भी धारा 16 के विद्यमान खंड (i) के साथ पढ़ा जाना चाहिए। प्रारूपण संबंधी पर तत्काल ध्यान अपेक्षित है, अन्यथा कर्मचारी दोहरी/तिहरी या अधिक मानक कटौती ले सकता है, यदि वह दो/तीन या अधिक नियोजकों के अधीन नियोजित है।
76. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1990 से अंत:स्थापित। इससे पहले इसका वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से लोप किया गया था।
77. संविधान के अनुच्छेद 276(2) में निम्नलिखित उपबंध है :
"276.(2) राज्य को या उस राज्य में किसी एक नगरपालिका, जिला बोर्ड, स्थानीय बोर्ड या अन्य स्थानीय प्राधिकारी किसी एक व्यक्ति के बारे में वृत्तियों, व्यापारों, आजीविकाओं और नियोजनों पर करों के रूप में संदेय कुल रकम दो हजार पचास रुपए प्रतिवर्ष से अधिक नहीं होगी।"
78. वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से लोप किया गया। इससे पहले खंड (iv) वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1968 से, वित्त अधिनियम, 1969 द्वारा 1.4.1970 से, वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से और वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1971 द्वारा 1.4.1972 से प्रतिस्थापित/संशोधित किया गया था।
79. वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से लोप किया गया।
[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

