आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 153ख

धारा 153क के अधीन निर्धारण पूरा करने के लिए समय सीमा

धारा

धारा संख्या

153ख

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2021

धारा 153क के अधीन निर्धारण पूरा करने के लिए समय सीमा

धारा 153क के अधीन निर्धारण पूरा करने के लिए समय सीमा

धारा 153क के अधीन निर्धारण पूरा करने के लिए समय सीमा

153ख. (1) धारा 153 में किसी बात के होते हुए भी निर्धारण अधिकारी,–

(क) धारा 153 की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट छह निर्धारण वर्षों के भीतर आने वाले प्रत्येक निर्धारण वर्ष की बाबत 85[और सुसंगत निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए] उस वित्तीय वर्ष के अंत से इक्कीस मास की अवधि के भीतर, जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए प्राधिकारों में से अंतिम को निष्पादित किया गया है, निर्धारण या पुनर्निर्धारण का आदेश करेगा;

(ख) उस पूर्ववर्ष से जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी ली जाती है या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा की जाती है, उस वित्तीय वर्ष के अंत से इक्कीस मास की अवधि के भीतर जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए प्राधिकारी में से अंतिम का निष्पादन किया गया था, निर्धारण या पुनर्निर्धारण का आदेश करेगा :

परंतु धारा 153ग में निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति की दशा में निर्धारण या पुन: निर्धारण करने के लिए परिसीमा अवधि इस उपधारा के खंड (क) या खंड (ख) में यथा निर्दिष्ट अवधि या उस वित्तीय वर्ष के जिसमें अभिगृहीत या अध्यपेक्षित लेखा बहियां या दस्तावेज या आस्तियां धारा 153ग के अधीन ऐसे अन्य व्यक्ति पर अधिकारिता रखने वाले निर्धारण अधिकारी को सौंपी जाती हैं, अंत से नौ मास, इसमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, होगी :

86[परंतु यह और कि उस दशा में, जहां धारा 132 के अधीन तलाशी या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकार को 1 अप्रैल, 2018 को आरंभ होने वाले वित्त वर्ष के दौरान निष्पादित किया गया था वहां,–

(i) इस उपधारा के खंड (क) या खंड (ख) के उपबंधों का ऐसे प्रभाव होगा मानो "इक्कीस मास" शब्दों के स्थान पर, "अठारह मास" शब्द रखे गए हों;

(ii) धारा 153ग में निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति की दशा में, निर्धारण या पुन: निर्धारण करने के लिए परिसीमा की अवधि उस वित्तीय वर्ष, जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के अंतिम प्राधिकारों को निष्पादित किया गया था, के अंत से अठारह मास की अवधि या उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें अभिगृहीत या अध्यपेक्षित लेखा बहियां या दस्तावेज या आस्तियों को धारा 153ग के अधीन ऐसे अन्य व्यक्ति पर अधिकारिता रखने वाले निर्धारण अधिकारी को सौंप दिया जाता है, के अंत से बारह मास की अवधि, जो भी पश्चात्वर्ती हो, होगी:

परंतु यह भी कि उस दशा में, जहां धारा 132 के अधीन तलाशी या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकारों को 1 अप्रैल, 2019 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले वित्तीय वर्ष के दौरान निष्पादित किया गया था वहां,–

(i) इस उपधारा के खंड (क) या खंड (ख) के उपबंधों का ऐसे प्रभाव होगा मानो "इक्कीस मास" शब्दों के स्थान पर, "बारह मास" शब्द रखे गए हों;

(ii) धारा 153ग में निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति की दशा में, निर्धारण या पुन: निर्धारण करने के लिए परिसीमा की अवधि उस वित्तीय वर्ष, जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के अंतिम प्राधिकारों को निष्पादित किया गया था, के अंत से बारह मास की अवधि या उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें अभिगृहीत या अध्यपेक्षित लेखा बहियां या दस्तावेज या आस्तियां धारा 153ग के अधीन ऐसे अन्य व्यक्ति पर अधिकारिता रखने वाले निर्धारण अधिकारी को सौंप दिया जाता है, के अंत से बारह मास की अवधि, जो भी पश्चात्वर्ती हो :

परंतु यह भी कि उस दशा में, जहां धारा 132 के अधीन तलाशी या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकार को निष्पादित किया गया था और कुल आय के निर्धारण या पुन: निर्धारण की कार्यवाहियों के अनुक्रम में धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन निर्देश किया गया है, वहां निर्धारण या पुन: निर्धारण का आदेश करने के लिए उपलब्ध अवधि को बारह मास से विस्तारित किया जाएगा:

परंतु यह भी कि उस दशा में, जहां धारा 153ग में निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति की दशा में कुल आय के निर्धारण या पुनर्निर्धारण के लिए कार्यवाहियों के अनुक्रम के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन निर्देश किया जाता है, वहां ऐसे अन्य व्यक्ति की दशा में निर्धारण या पुन:र्निर्धारण का आदेश करने के लिए उपलब्ध अवधि को बारह मास से विस्तारित किया जाएगा।]

(2) उपधारा (1) के खंड (क) और खंड (ख) में निर्दिष्ट प्राधिकारी को,–

(क) तलाशी की दशा में किसी ऐसे व्यक्ति की बाबत जिसके मामले में प्राधिकार का वारंट जारी किया गया है, बनाए गए अंतिम पंचनामे में अभिलिखित तलाशी पूरी होने पर,

(ख) धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा की दशा में, प्राधिकृत अधिकारी द्वारा लेखाबहियों या अन्य दस्तावेजों या आस्तियों की वास्तविक प्राप्ति पर,

निष्पादित किया गया समझा जाएगा ।

(3) इस धारा के उपबंध जैसे वे वित्त अधिनियम द्वारा उनके संशोधन से ठीक पहले थे, 1 जून, 2016 से पहले किए गए निर्धारण या पुनर्निर्धारण के किसी आदेश को या उसके संबंध में लागू होंगे :

87[परंतु जहां धारा 153क या धारा 153ग के अधीन कोई सूचना 1 जून, 2016 से पूर्व जारी की गई है और स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट समय के अपवर्जन के कारण ऐसी नियत तारीख तक निर्धारण पूरा नहीं हुआ है, वहां ऐसा निर्धारण इस धारा, जैसी वह वित्त अधिनियम, 2016 (2016 का 28) द्वारा उसके प्रतिस्थापन से ठीक पूर्व थी, के उपबंधों के अनुसार पूरा किया जाएगा।]

स्पष्टीकरण–इस धारा के अधीन परिसीमा अवधि की संगणना करने में,–

(i) वह अवधि, जिसके दौरान निर्धारण की कार्यवाही पर किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश द्वारा रोक लगा दी जाती है; या

(ii) उस तारीख से, जिसको निर्धारण अधिकारी निर्धारिती को धारा 142 की उपधारा (2क) के अधीन अपने लेखाओं की संपरीक्षा कराने का निदेश देता है, प्रारंभ होने वाली और–

(क) उस अंतिम तारीख को समाप्त होने वाली अवधि, जिसको निर्धारिती से ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट उस उपधारा के अधीन प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है; या

(ख) जहां ऐसे निदेश को किसी न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जाती है उस तारीख को समाप्त होने वाली अवधि जिसको ऐसे निदेश को अपास्त किए जाने संबंधी आदेश आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है; या

(iii) उस तारीख से जिसको निर्धारण अधिकारी धारा 142क की उपधारा (1) के अधीन मूल्यांकन अधिकारी को कोई निर्देश करता है प्रारंभ होने वाली, और उस तारीख को, जिसको निर्धारण अधिकारी द्वारा मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट प्राप्त की जाती है, समाप्त होने वाली अवधि; या

(iv) पूरी कार्रवाई या उसके किसी भाग को पुन: आरंभ करने में या निर्धारिती को धारा 129 के उपबंधों के अधीन पुन: सुनवाई का अवसर देने में लगा समय; या

(v) उस दशा में जहां आय-कर समझौता आयोग के समक्ष किया आवेदन उसके द्वारा नामंजूर कर दिया गया है या उसके समक्ष कार्यवाही करने के लिए उसके द्वारा अनुज्ञात नहीं किया गया है, वहां उस तारीख को जिसको धारा 245ग के अधीन समझौता आयोग के समक्ष आवेदन किया गया, आरंभ होने वाली और उस तारीख को जिसको धारा 245घ की उपधारा (1) के अधीन आदेश, प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा उक्त धारा की उपधारा (2) के अधीन प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि; या

(vi) उस तारीख से, जिसको धारा 245थ की उपधारा (1) के अधीन 87क[अग्रिम विनिर्णय के लिए प्राधिकरण के समक्ष या अग्रिम विनिर्णय के लिए बोर्ड के समक्ष]  कोई आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को जिसको धारा 245द की उपधारा (3) के अधीन आवेदन को खारिज करने वाला आदेश प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि; या

(vii) उस तारीख से, जिसको धारा 245थ की उपधारा (1) के अधीन 87क[अग्रिम विनिर्णय के लिए प्राधिकरण के समक्ष या अग्रिम विनिर्णय के लिए बोर्ड के समक्ष] कोई आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को जिसको धारा 245द की उपधारा (7) के अधीन उसके द्वारा घोषित अग्रिम विनिर्णय प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि; या

(viii) धारा 153 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट निर्धारण या पुनर्निर्धारण की किसी कार्यवाही या आदेश के बातिलीकरण की तारीख से प्रारंभ होने वाली और ऐसी तारीख तक की अवधि जिसको प्रधान आयुक्त या आयुक्त को ऐसे बातिलीकरण के आदेश को अपास्त करने वाला आदेश प्राप्त होता है; या

(ix) उस तारीख से, जिसको धारा 90 या धारा 90क में निर्दिष्ट किसी करार के अधीन किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा सूचना के आदान-प्रदान के लिए कोई निर्देश या निर्देशों में से प्रथम निर्देश किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को जिसको अनुरोध की गई सूचना अंतिम रूप से प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त की जाती है, समाप्त होने वाली अवधि या एक वर्ष की अवधि, इसमें से जो भी कम हो; या

(x) उस तारीख से जिसको धारा 144खक की उपधारा (1) के अधीन प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा किसी ठहराव को अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव घोषित किए जाने के लिए निर्देश प्राप्त किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को जिसको निर्धारण अधिकारी द्वारा उक्त धारा की उपधारा (3) या उपधारा (6) के अधीन कोई निदेश या उपधारा (5) के अधीन कोई आदेश प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि,

अपवर्जित की जाएगी :

परंतु यह कि जहां पूर्वोक्त अवधि के अपवर्जन के ठीक पश्चात् इस उपधारा के खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट परिसीमा की यथास्थिति, निर्धारण या पुनर्निर्धारण का आदेश करने के लिए निर्धारण अधिकारी के पास साठ दिनों से कम उपलब्ध हैं, वहां ऐसी शेष अवधि को साठ दिन तक विस्तारित किया जाएगा और परिसीमा की पूर्वोक्त अवधि को तद्नुसार विस्तारित किया गया समझा जाएगा :

परंतु यह और कि जहां धारा 92गक की उपधारा (3क) के परंतुक के अनुसार कीमत अंतरण अधिकारी को उपलब्ध अवधि साठ दिन तक बढ़ा दी जाती है वहां यदि निर्धारण अधिकारी को, यथास्थिति, निर्धारण या पुनर्निर्धारण का आदेश करने के लिए उपलब्ध परिसीमा अवधि साठ दिन से कम है, तो ऐसी शेष अवधि को साठ दिन तक बढ़ा दिया जाएगा और पूर्वोक्त परिसीमा अवधि को तद्नुसार बढ़ा हुआ समझा जाएगा :]

88[परंतु यह भी कि जहां धारा 245जक के अधीन समझौता आयोग के समक्ष किसी कार्यवाही का उपशमन होता है, वहां निर्धारण अधिकारी को, यथास्थिति, निर्धारण या पुन: निर्धारण का आदेश करने के लिए इस धारा के अधीन उपलब्ध अवधि, धारा 245जक की उपधारा (4) के अधीन अवधि के अपवर्जन के पश्चात् एक वर्ष से कम नहीं होगी; और जहां परिसीमा की ऐसी अवधि एक वर्ष से कम है, उसे एक वर्ष तक विस्तारित किया गया समझा जाएगा।]

88क[परंतु यह भी कि जहां निर्धारिती धारा 245ड़ की उपधारा (1) के अधीन आवेदन को वापस लेने के विकल्प का प्रयोग करता है, वहां यथास्थिति, निर्धारण, पुनर्निर्धारण या पुनर्संगणना का आदेश करने के लिए निर्धारण अधिकारी को उपलब्ध परिसीमा की अवधि उक्त धारा की उपधारा (5) के अधीन अवधि के अपवर्जन के पश्चात् एक वर्ष से कम नहीं होगी और जहां परिसीमा की ऐसी अवधि एक वर्ष से कम है, वहां वह एक वर्ष के लिए बढ़ाई गई समझी जाएगी।]

 

87क. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 "अग्रिम विनिर्णय के लिए प्राधिकरण के समक्ष" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

85. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।

86. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से दूसरे और तीसरे परन्तुक के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व दूसरा व तीसरा परन्तुक इस प्रकार थे:

"परंतु यह और कि उस दशा में जहां धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकार निष्पादित किया गया था और कुल आय के निर्धारण या पुनर्निर्धारण के लिए कार्यवाहियों के प्रक्रम के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन निर्देश किया जाता है, वहां इस धारा के खंड (क) और खंड (ख) के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "इक्कीस मास" शब्दों के स्थान पर "उनतालीस मास" शब्द रख दिए गए हों :

परंतु यह भी कि उस दशा में जहां धारा 153ग में निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति की दशा में कुल आय के निर्धारण या पुनर्निर्धारण के लिए कार्यवाहियों के प्रक्रम के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन निर्देश किया जाता है वहां ऐसे अन्य व्यक्ति की दशा में निर्धारण या पुनर्निर्धारण करने के लिए परिसीमा अवधि उस वित्तीय वर्ष के अंत से जिसमें धारा 132क के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकार निष्पादित किया गया था, तैंतीस मास या उस वित्तीय वर्ष के अंत से जिसमें ऐसे अन्य व्यक्ति पर अधिकारिता रखने वाले निर्धारण अधिकारी को धारा 153ग के अधीन अभिगृहीत या अध्यपेक्षित लेखा बही या दस्तावेज या आस्तियां सौंपी गई हैं, इक्कीस मास, इसमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, होगी ।"

87. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.6.2016 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

88. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।

88क. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.2.2021 से अतं:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

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