आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 153

निर्धारण, पुन: निर्धारण और पुन: संगणना को पूरा करने के लिए समय-सीमा

धारा

धारा संख्या

153

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2024 (सं.1)

निर्धारण, पुन: निर्धारण और पुन: संगणना को पूरा करने के लिए समय-सीमा

निर्धारण, पुन: निर्धारण और पुन: संगणना को पूरा करने के लिए समय-सीमा

निर्धारण, पुन: निर्धारण और पुन: संगणना को पूरा करने के लिए समय-सीमा

153. (1) उस निर्धारण वर्ष के अंत से, जिसमें आय पहली बार निर्धारणीय थी, इक्कीस मास की समाप्ति के पश्चात् किसी भी समय धारा 143 या धारा 144 के अधीन निर्धारण का कोई आदेश नहीं किया जाएगा :

79[परंतु 1 अप्रैल, 2018 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के संबंध में, किसी निर्धारण आदेश की बाबत इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "इक्कीस मास" शब्दों के स्थान पर "अठारह मास" शब्द रख दिए गए हो

 79कक[परंतु यह कि-

(i) 1 अप्रैल, 2019 से प्रांरभ होने वाले निर्धारण वर्ष से संबंधित किसी निर्धारण आदेश की बाबत, इस उपधारा के उपबंधों यह प्रभाव होगा, जैसा कि 'इक्कीस मास’ शब्दों के स्थान पर 'बारह मास’ शब्द रखे गए थे ;

(ii) 1 अप्रैल, 2020 से प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से संबंधित किसी निर्धारण आदेश की बाबत, इस उपधारा के उपबंधों का यह प्रभाव होगा, जैसे कि 'इक्कीस मास’ शब्दों के स्थान पर 'अठारह मास’ शब्द रखे गए थे] :

79क[परंतु यह भी कि 1 अप्रैल, 2021 को 1[***] प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से संबंधित निर्धारण के किसी ओदश के संबंध में भी, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो, "इक्कीस मास" शब्दों के स्थान पर "नौ मास" शब्द रख दिए गए थे]

1क[परंतु यह भी कि 1 अप्रैल, 2022 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से संबंधित निर्धारण के आदेश के संबंध में इस उपधारा के उपबंधों का वैसे ही प्रभाव होगा, मानो "इक्कीस मास" शब्दों के स्थान पर, "बारह मास" शब्द रख दिए गए हों ।]

77खख[(1क) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां धारा 139 की उपधारा (8क) के अधीन कोई विवरणी प्रस्तुत की जाती है, वहां उस वित्तीय वर्ष, जिसमें ऐसी विवरणी प्रस्तुत की गई थी, के अंत से 2[बारह मास] के अवसान से पूर्व किसी भी समय धारा 143 या धारा 144 के अधीन निर्धारण का कोई आदेश किया जा सकेगा।]

(2) उस वित्तीय वर्ष के अंत से, जिसमें धारा 148 के अधीन सूचना की तामील की गई थी, नौ मास की समाप्ति के पश्चात् धारा 147 के अधीन निर्धारण, पुन: निर्धारण और पुन: संगणना का कोई आदेश नहीं किया जाएगा :

80[परंतु जहां धारा 148 के अधीन सूचना 1 अप्रैल, 2019 को या उसके पश्चात् तामील की जाती है, वहां इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "नौ मास" शब्दों के स्थान पर "बारह मास" शब्द रख दिए गए हों।]

(3) 3[उपधारा (1), उपधारा (1क) और उपधारा (2)] में किसी बात के होते हुए उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से, जिसमें धारा 254 के अधीन 80कक[यथास्थिति, किसी निर्धारण को अपास्त या रद्द करने वाला या धारा 92गक के अधीन कोई आदेश] आदेश, यथास्थिति, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या 4[यथास्थिति, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त] द्वारा प्राप्त किया गया था या 4[यथास्थिति, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त] द्वारा धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश पारित किया गया था, से पहले किसी भी समय धारा 254 या धारा 263 या धारा 264 के अधीन किसी आदेश के अनुसरण में 80क[यथास्थिति, नए निर्धारण या धारा 92गक के अधीन नए आदेश] का आदेश किया जा सकेगा :

80[परंतु जहां 1 अप्रैल, 2019 को या उसके पश्चात् प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा धारा 254 के अधीन आदेश प्राप्त किया जाता है या, यथास्थिति, 4[यथास्थिति, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त] द्वारा धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश पारित किया जाता है, वहां इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "नौ मास" शब्दों के स्थान पर "बारह मास" शब्द रख दिए गए हों।]

5[(3क) उपधारा (1), उपधारा (1क), उपधारा (2) और उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, जहां निर्धारण या पुन: निर्धारण धारा 132 के अधीन तलाशी आरंभ किए जाने की या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा करने की तारीख को लंबित है, वहां उक्त उपधाराओं के अधीन, यथास्थिति, निर्धारण या पुन: निर्धारण के पूरा किए जाने के लिए उपलब्ध अवधि—

(क) उस मामले में, जहां ऐसी तलाशी धारा 132 के अधीन आरंभ की जाती है या ऐसी अध्यपेक्षा धारा 132क के अधीन की जाती है ;

(ख) ऐसे निर्धारिती के मामले में, जिससे अभिगृहीत या अध्यपेक्षित कोई धन, बुलियन, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज संबंधित है ;

(ग) ऐसे निर्धारिती के मामले में, जिससे अभिगृहीत या अध्यपेक्षित कोई लेखाबहियां या दस्तावेज संबंधित है या उनमें अंतर्विष्ट कोई सूचना उससे संबंधित है,

बारह मास तक बढ़ा दी जाएगी । ]

(4) 6[उपधारा (1), उपधारा (1क), उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (3क)] में किसी बात के होते हुए भी उस दशा में जहां निर्धारण या पुन: निर्धारण के लिए कार्यवाहियों के प्रकरण के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन कोई निर्देश किया गया है वहां उक्त 6[उपधारा (1),  उपधारा (1क), उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (3क)] के अधीन, यथास्थिति, निर्धारण या पुन: निर्धारण को पूरा करने के लिए उपलब्ध समयावधि को बारह मास के लिए बढ़ा दिया जाएगा।

(5) उस दशा में जहां 80ककक[यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या अंतरण मूल्यांकन अधिकारी] द्वारा कोई 80कख[यथास्थिति, नया निर्धारण या धारा 92गक के अधीन नया आदेश] या पुन: निर्धारण करने से भिन्न धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश को पूर्णत: या भागत: प्रभावी बनाया जाना है वहां ऐसे आदेश को उस मास के अंत से जिसमें, यथास्थिति, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 के अधीन आदेश प्राप्त किया गया था या प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या 7[यथास्थिति, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त] द्वारा धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश पारित किया गया था, तीन मास की अवधि के भीतर प्रभावी बनाया जाएगा :

परंतु उस दशा में जहां 80ककक[यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या अंतरण मूल्यांकन अधिकारी] के लिए, उसके नियंत्रण से परे कारणों से, पूर्वोक्त समय के भीतर ऐसे आदेश को प्रभावी बनाना संभव नहीं है वहां प्रधान आयुक्त या आयुक्त, यदि उसका समाधान हो जाता है तो 80ककक[यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या अंतरण मूल्यांकन अधिकारी] से लिखित में ऐसे कारणों की प्राप्ति पर ऐसे आदेश को प्रभावी बनाने के लिए छह मास का अतिरिक्त समय अनुज्ञात कर सकेगा :

81[परंतु यह और कि जहां धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अधीन किसी आदेश का निर्धारिती या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी दस्तावेज को प्रस्तुत करके सत्यापन अपेक्षित है या जहां निर्धारिती को सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाना है, वहां धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अधीन उक्त आदेश को प्रभावी करने वाला आदेश उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट समय के भीतर किया जाएगा।]

81क[(5क) जहां अंतरण मूल्यांकन अधिकारी, धारा 263 के अधीन किसी आदेश या निदेश को धारा 92गक के अधीन किसी आदेश के माध्यम से प्रभावी करता है और ऐसे आदेश को निर्धारण अधिकारी को अग्रेषित करता है, तो निर्धारण अधिकारी, निर्धारण या पुन:निर्धारण या पुन:संगणना के आदेश को उस मास के अंत से दो मास के भीतर, जिसमें अंतरण मूल्यांकन अधिकारी के आदेश को उसने प्राप्त किया था, अनुरूप उपांतरित करने के लिए कार्यवाही करेगा ।]

(6) 8[उपधारा (1), उपधारा (1क) और उपधारा (2)] की कोई बात निम्नलिखित वर्गों के निर्धारणों, पुन: निर्धारणों और पुन: संगणना को लागू नहीं होगी जो 81कक[उपधारा (3), उपधारा (5) और उपधारा (5क)] के उपबंधों के अध्यधीन–

(i) जहां धारा 250, धारा 254, धारा 260, धारा 262, धारा 263 और धारा 264 के अधीन किसी आदेश या इस अधिनियम के अधीन अपील या निर्देश के रूप में किए जाने से भिन्न कार्यवाही में किसी न्यायालय के किसी आदेश के अनुसरण में या उसमें अंतर्विष्ट किसी निष्कर्ष या निदेश को प्रभावी बनाने के लिए किसी निर्धारिती या किसी व्यक्ति पर निर्धारण, पुन: निर्धारण और पुन: संगणना की जाती है, उस मास के अंत से, जिसमें ऐसा आदेश, यथास्थिति, 9[प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या] प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त या पारित किया जाता है, बारह मास की समाप्ति पर या उससे पहले पूरा किया जाएगा ।

(ii) उस फर्म की दशा में, जहां धारा 147 के अधीन फर्म पर किए गए किसी निर्धारण के परिणामस्वरूप फर्म के किसी भागीदार पर निर्धारण किया जाता है वहां उस मास के अंत से, जिसमें फर्म के मामले में निर्धारण आदेश पारित किया गया है, बारह मास की समाप्ति पर या उससे पहले पूरा किया जाएगा।

(7) जहां उपधारा (5) या उपधारा (6) में निर्दिष्ट किसी आदेश, निष्कर्ष या निदेश को निर्धारण अधिकारी द्वारा उक्त उपधाराओं में विनिर्दिष्ट समय के भीतर प्रभावी बनाया जाना है और ऐसा आदेश उसमें विनिर्दिष्ट आय-कर प्राधिकारी द्वारा 1 जून, 2016 से पहले, यथास्थिति, प्राप्त या पारित किया गया है, वहां निर्धारण अधिकारी, 31 मार्च, 2017 को या उससे पहले ऐसे आदेश, निष्कर्ष या निदेश को प्रभावी बनाएगा या निर्धारिती की आय का निर्धारण, पुन: निर्धारण या पुन: संगणना करेगा।

(8) इस धारा, धारा 153क की उपधारा (2) और धारा 153ख की उपधारा (1) के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी किसी भी निर्धारण वर्ष के संबंध में निर्धारण या पुन: निर्धारण का कोई ऐसा आदेश, जो धारा 153क की उपधारा (2) के अधीन परिवर्तित हो गया है, ऐसे प्रवर्तित होने के मास के अंत से एक वर्ष के भीतर या इस धारा अथवा धारा 153ख की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर, इसमें जो भी पश्चात्वर्ती हो, पूरा किया जाएगा।

(9) इस धारा के उपबंध, जैसे ये वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा उनके संशोधन से ठीक पूर्व थे, 1 जून, 2016 से पहले निर्धारण, पुन: निर्धारण या पुन: संगणना को या उनके संबंध में लागू होंगे :

82[परंतु जहां धारा 142 की उपधारा (1) या धारा 143 की उपधारा (2) या धारा 148 के अधीन सूचना 1 जून, 2016 से पहले जारी की गई है और स्पष्टीकरण 1 में निर्दिष्ट समय के अपवर्जन के कारण उस तारीख तक निर्धारण या पुन: निर्धारण पूरा नहीं किया गया है, वहां ऐसा निर्धारण या पुन: निर्धारण इस धारा के उपबंधों के अनुसार, जैसी वह वित्त अधिनियम, 2016 (2016 का 28) द्वारा इसके प्रतिस्थापन से ठीक पहले थी, किया जाएगा।]

स्पष्टीकरण 1–इस धारा के प्रयोजनों के लिए परिसीमा की अवधि की संगणना में निम्नलिखित को अपवर्जित कर दिया जाएगा–

(i) कार्यवाहियों के पूर्ण या उसके किसी भाग को पुन: आरंभ करने या धारा 129 के परंतुक के अधीन निर्धारिती को सुनवाई का अवसर देने में लगा समय, या

(ii) वह कालावधि, जिसके दौरान निर्धारण कार्यवाही किसी न्यायालय के किसी आदेश या व्यादेश द्वारा रोक दी गई है, या

(iii) उस तारीख से प्रारंभ होने वाली, जिसको निर्धारण अधिकारी, केंद्रीय सरकार या विहित प्राधिकारी को, धारा 143 की उपधारा (3) के परंतुक के खंड (i) के अधीन 82ख[उपबंधों के उलंघन] के खंड (21) या खंड (22ख) या खंड (23क) या खंड (23ख) की सूचना देता है और उस तारीख को समाप्त होने वाली, जिसको उन खंडों के अधीन, यथास्थिति, अनुमोदन को वापस लेने के आदेश या अधिसूचना के विखंडन के प्रति निर्धारण अधिकारी द्वारा प्राप्त की जाती है, कालावधि, या

(iv) उस तारीख को, जिसको निर्धारण अधिकारी निर्धारिती को अपने लेखाओं की संपरीक्षा 9[या तालिका मूल्यांकन] धारा 142 की उपधारा (2क) के अधीन कराने का निदेश देता है, प्रारंभ होने वाली और,–

(क) उस अंतिम तारीख को समाप्त होने वाली अवधि, जिसको निर्धारिती से ऐसी संपरीक्षा 10[या तालिका मूल्यांकन] की रिपोर्ट उस उपधारा के अधीन प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है; या

(ख) जहां ऐसे निदेश को किसी न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जाती है, उस तारीख को समाप्त होने वाली अवधि, जिसको ऐसे निदेश को अपास्त किए जाने संबंधी ऐसा निदेश आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है; या

(v) उस तारीख से, जिसको निर्धारण अधिकारी धारा 142क की उपधारा (1) के अधीन मूल्यांकन अधिकारी को कोई निर्देश करता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको निर्धारण अधिकारी द्वारा मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट प्राप्त की जाती है, समाप्त होने वाली कालावधि; या

(vi) उस तारीख, जिसको निर्धारण अधिकारी धारा 158क की उपधारा (1) के अधीन घोषणा प्राप्त करता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको उस धारा की उपधारा (3) के अधीन उसके द्वारा आदेश किया जाता है, समाप्त होने वाली (साठ दिन से अनधिक की) कालावधि, या

(vii) उस दशा में जहां आय-कर समझौता आयोग के समक्ष किया गया आवेदन उसके द्वारा नामंजूर कर दिया गया है या उसके समक्ष कार्यवाही किए जाने के लिए उसके द्वारा अनुज्ञात नहीं किया है, वहां उस तारीख से जिसको धारा 245ग के अधीन समझौता आयोग के समक्ष आवेदन किया जाता है, आरंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको उस धारा की उपधारा (2) के अधीन प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा धारा 245घ की उपधारा (1) के अधीन आदेश प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली कालावधि, या

(viii) उस तारीख स,े जिसको धारा 245थ की उपधारा (1) के अधीन 82क[अग्रिम विनिर्णय के लिए प्राधिकरण के समक्ष या अग्रिम विनिर्णय के लिए बोर्ड के समक्ष] कोई आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको धारा 245द की उपधारा (3) के अधीन आवेदन को खारिज करने वाला आदेश आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली कालावधि, या

(ix) उस तारीख से, जिसको धारा 245थ की उपधारा (1) के अधीन 82क[अग्रिम विनिर्णय के लिए प्राधिकरण के समक्ष या अग्रिम विनिर्णय के लिए बोर्ड के समक्ष] कोई आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको धारा 245द की उपधारा (7) के अधीन उसके द्वारा घोषित अग्रिम विनिर्णय आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली कालावधि, या

(x) उस तारीख से, जिसको धारा 90 या धारा 90क में निर्दिष्ट किसी करार के अधीन किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा सूचना के आदान-प्रदान के लिए कोई निर्देश या निर्देशों में से प्रथम निर्देश किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको अनुरोध की गई सूचना अंतिम रूप से आयुक्त द्वारा प्राप्त की जाती है, समाप्त होने वाली अवधि या एक वर्ष की कालावधि, इनमें से जो भी कम हो, या

(xi) उस तारीख से, जिसको धारा 144खक की उपधारा (1) के अधीन आयुक्त द्वारा किसी ठहराव को अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव घोषित किए जाने के लिए कोई निर्देश प्राप्त किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको निर्धारण अधिकारी द्वारा उक्त धारा की उपधारा (3) या उपधारा (6) के अधीन कोई निदेश या उपधारा (5) के अधीन कोई आदेश प्राप्त किया जाता है,  82कक[समाप्त होने वाली कालावधि ; या

(xii) उस तारीख से आरंभ होने वाली कालावधि (जो एक सौ अस्सी दिन से अधिक नहीं होगी), जिसको धारा 132 के अधीन तलाशी आरंभ की जाती है या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा की जाती है और उस तारीख को समाप्त होने वाली कालावधि, यथास्थिति, जिसको धारा 132 के अधीन अभिगृहीत या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षित लेखाबहियां या अन्य दस्तावेज या कोई धनराशि, बुलियन, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज को ऐसे निर्धारिती पर अधिकारिता रखने वाले निर्धारण अधिकारी को सौंप दिया जाता हैं,-

(क) जिसकी दशा में धारा 132 के अधीन तलाशी आरंभ की जाती है या धारा 132क के अधीन ऐसी अध्यपेक्षा की जाती है ; या

(ख) जिससे कोई ऐसा धन, बुलियन, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज, जिसे अभिगृहीत या अध्यपेक्षित किया गया है, संबंधित है ; या

(ग) जिससे ऐसी लेखाबहियां या अन्य दस्तावेज, जिनका अभिग्रहण या अध्यपेक्षा की गई है, संबंधित है या उनमें अंतर्विष्ट कोई सूचना संबंधित है,]

82कख[(xiii) उस तारीख से प्रारंभ होने वाली कालावधि, जिसको निर्धारण अधिकारी धारा 143 की उपधारा (3) के दूसरे परंतुक के अधीन प्रधान आयुक्त या आयुक्त को प्रतिनिर्देश करता है और उस तारीख को समाप्त होने वाली कालावधि, जिसको, यथास्थिति, धारा 10 के खंड (23ग) के पन्द्रहवें परंतुक के खंड (ii) या खंड (iii) या धारा 12कख की उपधारा (4) के खंड (ii) या खंड (iii) के अधीन आदेश की प्रति निर्धारण अधिकारी द्वारा प्राप्त की जाती है,।]

परंतु जहां पूर्वोक्त समय या अवधि के अपवर्जन के पश्चात् 11[उपधारा (1), उपधारा (1क) और उपधारा (2)], उपधारा (3) और उपधारा (7) के अधीन निर्दिष्ट वह परिसीमाकाल, जो निर्धारण अधिकारी को, यथास्थिति, निर्धारण, पुन: निर्धारण, पुन: संगणना का आदेश करने के लिए उपलब्ध है, साठ दिन से कम है, वहां ऐसी अवशिष्ट अवधि साठ दिन तक विस्तारित की जाएगी और पूर्वोक्त परिसीमाकाल तद्नुसार विस्तारित किया गया समझा जाएगा :

परंतु यह और कि जहां धारा 92गक की उपधारा (3क) के परंतुक के अनुसार अंतरण मूल्यांकन अधिकारी को उपलब्ध समयावधि साठ दिन बढ़ा दी जाती है, और, यथास्थिति, निर्धारण, पुन: निर्धारण या पुन: संगणना का आदेश करने के लिए निर्धारण अधिकारी को उपलब्ध परिसीमा की अवधि साठ दिन से कम है, वहां ऐसी अवशिष्ट अवधि साठ दिन तक विस्तारित की जाएगी और पूर्वोक्त परिसीमाकाल तद्नुसार विस्तारित किया गया समझा जाएगा :

परंतु यह भी कि जहां समझौता आयोग के समक्ष किसी कार्यवाही का धारा 245जक के अधीन उपशमन हो जाता है वहां, यथास्थिति, निर्धारण, पुन: निर्धारण या, पुन: संगणना का आदेश करने के लिए निर्धारण अधिकारी को उपलब्ध परिसीमा की अवधि धारा 245जक की उपधारा (4) के अधीन अवधि के अपवर्जन के पश्चात् एक वर्ष से कम की नहीं होगी; और जहां परिसीमा की ऐसी अवधि एक वर्ष से कम है, वहां वह एक वर्ष के लिए बढ़ाई गई समझी जाएगी; और धारा 149, 83[***], धारा 154, धारा 155 और धारा 158खड़ के अधीन परिसीमा की अवधि का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए और धारा 244क के अधीन ब्याज के संदाय के प्रयोजनों के लिए यह परंतुक भी तद्नुसार लागू होगा।

83क[परंतु यह भी कि जहां निर्धारिती धारा 245ड की उपधारा (1) के अधीन आवेदन को वापस लेने के विकल्प का प्रयोग करता है, वहां यथास्थिति, निर्धारण, पुनर्निर्धारण या पुनर्संगणना का आदेश करने के लिए निर्धारण अधिकारी को उपलब्ध परिसीमा की अवधि उक्त धारा की उपधारा (5) के अधीन अवधि के उपवर्जन के पश्चात् एक वर्ष से कम नहीं होगी और जहां परिसीमा की ऐसी अवधि एक वर्ष से कम है, वहां वह एक वर्ष के लिए बढ़ाई गई समझी जाएगी :

परंतु यह भी कि धारा 149, धारा 154 तथा धारा 155 के अधीन परिसीमा की अवधि का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए धारा 244क के अधीन ब्याज के संदाय के प्रयोजनो के लिए चौथे परंतुक के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।]

स्पष्टीकरण 2–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, जहां उपधारा (6) के खंड (i) में निर्दिष्ट किसी आदेश द्वारा,–

(क) किसी निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारिती की कुल आय में से किसी आय को अपवर्जित किया जाता है, वहां किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए ऐसी आय का निर्धारण धारा 150 और इस धारा के प्रयोजनों के लिए उक्त आदेश में अंतर्विष्ट किसी निष्कर्ष या निदेश के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए किया गया निर्धारण समझा जाएगा;

(ख) कोई आय किसी एक व्यक्ति की कुल आय में से अपवर्जित की जाती है और अन्य व्यक्ति की आय मानी जाती है वहां ऐसे अन्य व्यक्ति पर ऐसी आय का निर्धारण धारा 150 और इस धारा के प्रयोजनों के लिए उक्त आदेश में अंतर्विष्ट किसी निष्कर्ष या निदेश के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए किया गया निर्धारण समझा जाएगा यदि उक्त आदेश के पारित किए जाने के पूर्व ऐसे अन्य व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिया गया था।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप मेंें]

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