आकलन और फिर से आकलन पूरा करने के लिए समय सीमा
निर्धारण और पुन: निर्धारणों को पूरा करने के लिए समय-सीमा
153. 55[(1) धारा 143 या धारा 144 के अधीन कोर्इ निर्धारण आदेश56 निम्नलिखित अवधियों की समाप्ति के, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, पश्चात् किसी समय नहीं किया जाएगा–
(क) जिस निर्धारण वर्ष में वह आय सर्वप्रथम निर्धारणीय थी उस निर्धारण वर्ष के अंत से दो वर्ष के पश्चात्, या
(ख) जिस वित्तीय वर्ष में धारा 139 की उपधारा (4) या उपधारा (5) के अधीन विवरणी या पुनरीक्षित विवरणी 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या उसके पूर्ववर्ती निर्धारण वर्ष के संबंध में दाखिल की जाती है उसके अंत से एक वर्ष के पश्चात्।]
57[(2) धारा 147 के अधीन निर्धारण, पुन:निर्धारण या पुन:संगणना का कोर्इ आदेश, उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें धारा 148 के अधीन सूचना की तामील की गर्इ थी, अंत से 58[एक वर्ष] की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा :
59[परन्तु जहां धारा 148 के अधीन सूचना की तामील 1 अप्रैल, 1999 को या उसके पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 2000 से पूर्व की गर्इ थी, वहां ऐसा निर्धारण, पुन:निर्धारण या पुन:संगणना 31 मार्च, 2002 तक किसी भी समय की जा सकेगी।]
60[(2क) उपधारा (1) और उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी 1 अप्रैल, 1971 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष और उसके पश्चात् के किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में धारा 250, धारा 254, धारा 263 या धारा 264 के अधीन, किसी निर्धारण को अपास्त या रद्द करने वाले आदेश के अनुसरण में नए सिरे से निर्धारण का आदेश, उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें धारा 250 या धारा 254 के अधीन आदेश यथास्थिति, मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है या मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा धारा 263 या धारा 264 के अधीन पारित किया जाता है, अंत से एक वर्ष की समाप्ति के पूर्व किसी भी समय किया जा सकेगा:
परन्तु जहां धारा 250 या धारा 254 के अधीन आदेश, यथास्थिति, मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, या धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा 1 अप्रैल, 1999 को या उसके पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 2000 से पूर्व पारित किया जाता है वहां नए सिरे से निर्धारण का ऐसा कोर्इ आदेश 31 मार्च, 2002 तक किसी भी समय किया जा सकेगा।]
(3) उपधारा (1) और (2) के उपबंध निम्नलिखित निर्धारणों, पुन:निर्धारणों और पुन: संगणनाओं के वर्गों को लागू नहीं होंगे जिनको 61[उपधारा (2क) के उपबंधों के अधीन रहते हुए] किसी भी समय पूरा किया जा सकेगा–
(i) 62[* * *]
(ii) जहां निर्धारिती या किसी व्यक्ति63 की बाबत निर्धारण, पुन: निर्धारण या पुन: संगणना धारा 250, 254, 260, 262, 263 या 264 के अधीन आदेश में 64[या इस अधिनियम के अधीन अपील या निर्देश के रूप में कार्यवाही से भिन्न किसी कार्यवाही में किसी न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश में] अंतर्विष्ट किसी निष्कर्ष65 या निदेश65 के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए63 की जाती है;
(iii) जहां किसी फर्म की दशा में धारा 147 के अधीन फर्म के संबंध में किए गए निर्धारण के परिणामस्वरूप फर्म के किसी भागीदार के संबंध में निर्धारण किया जाता है।
66[स्पष्टीकरण 1.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए परिसीमाकाल की गणना करने में–
(i) सम्पूर्ण कार्यवाही या उसके किसी भाग को पुन: शुरू करने में या धारा 129 के परन्तुक के अधीन निर्धारिती को पुन: से सुनवार्इ का अवसर देने में लगे समय को; या
(ii) उस अवधि को, जिसके दौरान निर्धारण की कार्यवाही67 पर किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश द्वारा रोक लगा दी जाती है; या
68[(iiक) उस तारीख को, जिसको निर्धारण अधिकारी, केन्द्रीय सरकार या विहित प्राधिकारी को, धारा 143 की उपधारा (3) के परन्तुक के खंड (i) के अधीन धारा 10 के खंड (21) या खंड (22ख) या खंड (23क) या खंड (23ख) या खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के उपबंधों के उल्लंघन की सूचना देता है प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको उन खंडों के अधीन, यथास्थिति, अनुमोदन को वापस लेने के आदेश या अधिसूचना के विखंडन की प्रति निर्धारण अधिकारी द्वारा प्राप्त की जाती है, समाप्त होने वाली अवधि;]
(iii) उस तारीख से, जिसको 69[निर्धारण] अधिकारी धारा 142 की उपधारा (2क) के अधीन अपने लेखाओं की संपरीक्षा कराने का निदेश निर्धारिती को देता है, प्रारम्भ होने वाली और 70[उस तारीख को, जिसको उस उपधारा के अधीन निर्धारिती ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट देता है], समाप्त होने वाली अवधि; या
(iv) 71[* * *]
72[(ivक) उस तारीख से, जिसको 73[निर्धारण] अधिकारी धारा 158क की उपधारा (1) के अधीन घोषणा प्राप्त करता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको उस धारा की उपधारा (3) के अधीन उसके द्वारा आदेश किया जाता है, समाप्त होने वाली (साठ दिन से अनधिक) की अवधि; या]
(v) ऐसे मामले में, जिसमें धारा 245ग के अधीन आय-कर समझौता आयोग के समक्ष किया गया आवेदन उसके द्वारा नामंजूर कर दिया जाता है, अथवा उसके द्वारा उस पर कार्यवाही करने की अनुज्ञा नहीं दी जाती है, उस तारीख से, जिसको ऐसा आवेदन किया जाता है, प्रारम्भ होने वाली और उस तारीख को जिसको धारा 245घ की उपधारा (1) के अधीन आदेश उस धारा की उपधारा (2) के अधीन आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली कालावधि; 73क[या]
73क[(vi) उस तारीख से, जिसको धारा 245थ की उपधारा (1) के अधीन अग्रिम विनिर्णय संबंधी प्राधिकरण के समक्ष कोर्इ आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको धारा 245द की उपधारा (3) के अधीन आवेदन को नामंजूर करने वाला आदेश आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि; या
(vii) उस तारीख से, जिसको धारा 245थ की उपधारा (1) के अधीन अग्रिम विनिर्णय संबंधी प्राधिकरण के समक्ष कोर्इ आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको धारा 245द की उपधारा (7) के अधीन उसके द्वारा घोषित अग्रिम विनिर्णय आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि,]
को छोड़ दिया जाएगा :
74[परन्तु जहां पूर्वोक्त समय या अवधि को छोड़े जाने के ठीक पश्चात्, उपधारा (1), उपधारा (2) और उपधारा (2क) में निर्दिष्ट वह परिसीमाकाल, जो निर्धारण अधिकारी को यथास्थिति, निर्धारण, पुन: निर्धारण या पुन: संगणना का आदेश करने के लिए उपलब्ध है, साठ दिन से कम है, वहां ऐसी शेष अवधि साठ दिन बढ़ार्इ जाएगी और पूर्वोक्त परिसीमाकाल तदनुसार बढ़ाया गया समझा जाएगा।]
स्पष्टीकरण 2.–जहां 75[उपधारा (3) के खंड (ii) में निर्दिष्ट] किसी आदेश द्वारा किसी निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारिती की कुल आय में से किसी आय को अपवर्जित किया जाता है, वहां किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए ऐसी आय का निर्धारण, धारा 150 और इस धारा के प्रयोजनों के लिए, उक्त आदेश में अन्तर्विष्ट किसी निष्कर्ष या निदेश के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए किया गया निर्धारण समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण 3.–जहां 75[उपधारा (3) के खंड (ii) में निर्दिष्ट] किसी आदेश द्वारा कोर्इ आय किसी एक व्यक्ति की कुल आय में से अपवर्जित की जाती है और अन्य व्यक्ति76 की आय मानी जाती है; वहां ऐसे अन्य व्यक्ति पर ऐसी आय का निर्धारण धारा 150 और इस धारा के प्रयोजनों के लिए, उक्त आदेश में अन्तर्विष्ट किसी निष्कर्ष या निदेश के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए किया गया निर्धारण समझा जाएगा, परन्तु यह तब जबकि उक्त आदेश के पारित किए जाने के पूर्व ऐसे अन्य व्यक्ति को सुनवार्इ का अवसर दिया गया था।
55. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित। इससे पहले उपधारा (1) प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा उसी तारीख से प्रतिस्थापित की गर्इ थी। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (1) [जो प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा प्रतिस्थापन से पूर्व विद्यमान थी] जो वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1968 से प्रतिस्थापित की गर्इ थी और बाद में कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से संशोधित की गर्इ थी, और वह निम्न प्रकार थी :
"(1) धारा 143 या धारा 144 के अधीन कोर्इ निर्धारण आदेश–
(क) (i) उस निर्धारण वर्ष के अंत से चार वर्ष बीतने के पश्चात्, जिसमें आय प्रथम बार निर्धार्य थी, जहां ऐसा निर्धारण वर्ष वह निर्धारण वर्ष है जो 1 अप्रैल, 1967 को या उसके पूर्व प्रारंभ होता है;
(ii) उस निर्धारण वर्ष के अंत से 3 वर्ष जिसमें आय प्रथम बार निर्धार्य थी, जहां ऐसा निर्धारण वर्ष वह निर्धारण वर्ष है जो 1 अप्रैल, 1968 को या उसके पूर्व प्रारंभ होता है;
(iii) उस निर्धारण वर्ष के अंत से 2 वर्ष जिसमें आय प्रथम बार निर्धार्य थी, जहां ऐसा निर्धारण वर्ष वह निर्धारण वर्ष है जो 1 अप्रैल, 1969 को या उसके पूर्व प्रारंभ होता है; या
(ख) उस निर्धारण वर्ष के अंत से आठ वर्ष बीतने पर जिसमें आय प्रथम बार निर्धार्य थी, जहां मामला धारा 271 की उपधारा (1) के खंड (ग) में आता है;
(ग) धारा 139 की उपधारा (4) या उपधारा (5) के अधीन विवरणी या संशोधित विवरणी दाखिल करने की तारीख से एक वर्ष बीतने के पश्चात्;
(घ) उस मास के अंत से जिसमें धारा 143 की उपधारा (2) के खंड (क) के अधीन आवेदन निर्धारण द्वारा किया जाए, 6 मास बीतने पर,
इनमें से जो भी सबसे बाद में हो, किसी समय नहीं किया जाएगा।"
56. "निर्धारण आदेश" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
57. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से निम्नलिखित उपधारा (2) के स्थान पर प्रतिस्थापित :–
"(2) धारा 147 के अधीन–
(क) जहां निर्धारण, पुनर्निधारण या पुन:संगणना उस धारा के खंड (क) के अधीन किया जाना है, वहां उस निर्धारण वर्ष के अंत से जिसमें धारा 148 के अधीन सूचना तामील की गर्इ थी, 4 वर्ष की समाप्ति पर
(ख) जहां निर्धारण, पुनर्निर्धारण या पुनर्गणना उस धारा के खंड (ख) के अधीन किया जाना है, वहां–
(i) उस निर्धारण वर्ष के अंत से जिसमें आय प्रथम बार निर्धार्य थी, चार वर्ष या
(ii) धारा 148 के अधीन नोटिस की तामील की तारीख से एक वर्ष,
इनमें से जो भी बाद की हो, की समाप्ति के पश्चात् निर्धारण, पुनर्निर्धारण या पुन:संगणना का कोर्इ आदेश नहीं किया जाएगा।
58. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से "दो वर्ष" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
59. यथोक्त द्वारा परन्तुक प्रतिस्थापित किया गया। प्रतिस्थापन से पूर्व परन्तुक निम्न प्रकार था :
"परन्तु जहां धारा 148 के अधीन सूचना 31 मार्च, 1987 को या उससे पूर्व तामील की गर्इ थी वहां ऐसा निर्धारण, पुनर्निर्धारण या पुन:संगणना 31 मार्च, 1990 तक किसी भी समय की जा सकेगी।"
60. यथोक्त द्वारा प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (2क), जो कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से अंत:स्थापित की गर्इ थी और बाद में प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से संशोधित की गर्इ थी, निम्न प्रकार थी :
"(2क) उपधारा (1) और (2) में किसी बात के होते हुए भी, 1 अप्रैल, 1971 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के संबंध में, और किसी बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में, निर्धारण को अपास्त या रद्द करते हुए, धारा 146 के अधीन या धारा 250, धारा 254, धारा 263 या धारा 264 के अधीन किसी आदेश के अनुसरण में नए निर्धारण का आदेश उस वित्तीय वर्ष के अंत से जिसमें निर्धारण रद्द करते हुए धारा 146 के अधीन आदेश यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित किया जाए या धारा 250 या धारा 254 के अधीन आदेश मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाए या धारा 263 या धारा 264 के अधीन मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा आदेश पारित किया जाए, दो वर्ष की समाप्ति से पूर्व पर किसी समय किया जा सकता है।"
61. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से अंत:स्थापित।
62. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से लोप किया गया। लोप से पूर्व खंड (i) इस प्रकार था :
"(i) जहां धारा 146 के अधीन नए सिरे से निर्धारण किया जाता है;"
63. "किसी व्यक्ति" और "के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए" पदों के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
64. प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से अंत:स्थापित।
65. "निष्कर्ष" या "निदेश" पदों के लिए अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
66. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.1.1976 से खंड (i), (ii) और (iv) के संबंध में तथा खंड (iii) और खंड (v) के संबंध में 1.4.1976 से प्रतिस्थापित।
67. "निर्धारण की कार्यवाही" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
68. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से अंत:स्थापित।
69. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
70. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से "उस तारीख को जिसको निर्धारिती संपरीक्षा की रिपोर्ट देता है" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
71. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया। लोप से पूर्व खंड (iv) इस प्रकार था :
"(iv) उस तारीख से, जिसको निर्धारण अधिकारी धारा 144ख की उपधारा (1) के अधीन प्ररूप आदेश निर्धारिती को भेजता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, समाप्त होने वाली अवधि (ज्यादा से ज्यादा 180 दिन) जिसको निर्धारण अधिकारी उस धारा की उपधारा (4) के अधीन उपायुक्त से निदेश प्राप्त करता है, अथवा, उस मामले में जिसमें प्ररूप आदेश के बारे में निर्धारिती से कोर्इ आपत्ति प्राप्त नहीं होती है, 30 दिन की अवधि, या"
72. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से अंत:स्थापित।
73. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
73क. वित्त (संñ 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से अंत:स्थापित।
74. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 27.9.1991 से अंत:स्थापित।
75. प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से "धारा 250, 254, 260, 262, 263 या 264 के अधीन" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
76. "अन्य व्यक्ति" पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा संशोधित रूप में]

