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धारा 139

लेखा परीक्षकों की नियुक्ति

धारा

धारा संख्या

139

अध्याय शीर्षक

अध्याय X - लेखापरीक्षा और लेखा परीक्षक

अधिनियम

कंपनी अधिनियम, 2013

वर्ष

लेखा परीक्षकों की नियुक्ति

लेखा परीक्षकों की नियुक्ति

अध्याय X

लेखा परीक्षा और लेखा परीक्षक

लेखा परीक्षकों की नियुक्ति ।

139.(1) इस अध्याय के प्रावधानों के अधीन, प्रत्येक कंपनी, प्रथम वार्षिक आम बैठक में, किसी व्यक्ति या फर्म को लेखा परीक्षक के रूप में नियुक्त करेगी, जो उस बैठक के समापन से लेकर छठी वार्षिक आम बैठक के समापन तक और उसके बाद प्रत्येक छठी बैठक के समापन तक पद धारण करेगा और ऐसी बैठक में कंपनी के सदस्यों द्वारा लेखा परीक्षकों के चयन की रीति और प्रक्रिया ऐसी होगी, जैसी की निर्धारित की जा सकती है :

[***]

आगे यह प्रदान किया गया है कि ऐसी नियुक्ति किए जाने से पूर्व, ऐसी नियुक्ति के लिए लेखापरीक्षक की लिखित सहमति तथा उससे यह प्रमाणपत्र कि यदि नियुक्ति की जाती है तो वह निर्धारित शर्तों के अनुसार होगी, लेखापरीक्षक से प्राप्त किया जाएगा:

आगे यह भी प्रावधान है कि प्रमाणपत्र में यह भी दर्शाया जाएगा कि क्या लेखापरीक्षक धारा 141 में दिए गए मानदंडों को पूरा करता है:

यह भी प्रावधान है कि कंपनी संबंधित लेखापरीक्षक को उसकी नियुक्ति के बारे में सूचित करेगी तथा उस बैठक के पंद्रह दिन के भीतर पंजीयक के पास ऐसी नियुक्ति की सूचना भी दाखिल करेगी जिसमें लेखापरीक्षक की नियुक्ति की गई है।

स्पष्टीकरण। —इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, "नियुक्ति" में पुनर्नियुक्ति भी शामिल है।

(2) कोई भी सूचीबद्ध कंपनी या कंपनियों के ऐसे वर्ग या वर्गों से संबंधित कोई कंपनी, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, नियुक्त या पुनर्नियुक्त नहीं करेगी-

(क)   कोई व्यक्ति लगातार पांच वर्षों की एक से अधिक अवधि के लिए लेखा परीक्षक के रूप में कार्य करता है; तथा
(ख)   किसी लेखापरीक्षा फर्म में लगातार पांच वर्षों के दो से अधिक कार्यकालों के लिए लेखापरीक्षक के रूप में कार्य करना:

बशर्ते कि—

(झ)   कोई व्यक्तिगत लेखा परीक्षक, जिसने खंड ( क ) के अंतर्गत अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है, अपने कार्यकाल के पूरा होने से पांच वर्ष तक उसी कंपनी में लेखा परीक्षक के रूप में पुनः नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा;
(ii)   कोई लेखापरीक्षा फर्म, जिसने खंड ( ख ) के अधीन अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है, ऐसे कार्यकाल के पूरा होने से पांच वर्ष तक उसी कंपनी में लेखापरीक्षक के रूप में पुनः नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगी:

आगे प्रावधान किया जाता है कि नियुक्ति की तारीख को किसी लेखापरीक्षा फर्म को, जिसका अन्य लेखापरीक्षा फर्म का साझा साझेदार या साझेदार है, जिसका कार्यकाल वित्तीय वर्ष से ठीक पहले किसी कंपनी में समाप्त हो गया है, उसी कंपनी के लेखापरीक्षक के रूप में पांच वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त नहीं किया जाएगा:

[ यह भी प्रावधान है कि इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर या उसके पूर्व विद्यमान प्रत्येक कंपनी, जिससे इस उपधारा के उपबंधों का अनुपालन करने की अपेक्षा की जाती है, इस उप-धारा की अपेक्षाओं का अनुपालन ऐसी अवधि के भीतर करेगा जो कंपनी की प्रथम वार्षिक आम बैठक की तारीख से पश्चात् नहीं होगी, धारा 96 की उप-धारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर, इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से तीन वर्ष के पश्चात् होगी :]

यह भी प्रावधान किया गया है कि, इस उप-धारा में निहित कोई भी बात कंपनी के लेखा परीक्षक को हटाने के अधिकार या कंपनी के ऐसे पद से लेखा परीक्षक के त्यागपत्र देने के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी।

(3) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी कंपनी के सदस्य यह संकल्प कर सकेंगे कि—

(क)   उसके द्वारा नियुक्त लेखापरीक्षा फर्म में, लेखापरीक्षा भागीदार और उसकी टीम को ऐसे अंतरालों पर चक्रित किया जाएगा जैसा कि सदस्यों द्वारा संकल्प किया जा सकता है; या
(ख)   लेखापरीक्षा एक से अधिक लेखापरीक्षकों द्वारा की जाएगी।

(4) केन्द्रीय सरकार नियमों द्वारा वह रीति निर्धारित कर सकती है जिससे कम्पनियां उपधारा (2) के अनुसरण में अपने लेखापरीक्षकों का परिवर्तन करेंगी।

स्पष्टीकरण. —इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, शब्द "फर्म" में सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 (2009 का 6) के अधीन निगमित सीमित दायित्व भागीदारी शामिल होगी।

(5) उप-धारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, किसी सरकारी कंपनी या किसी अन्य कंपनी की दशा में, जो प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या सरकारों के स्वामित्व में हो या उसके नियंत्रण में हो, या आंशिक रूप से केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व में हो और आंशिक रूप से एक या अधिक राज्य सरकारों के स्वामित्व में हो भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक, किसी वित्तीय वर्ष के संबंध में, वित्तीय वर्ष के प्रारंभ से एक सौ अस्सी दिन की अवधि के भीतर, इस अधिनियम के अधीन कंपनियों के लेखापरीक्षक के रूप में नियुक्त होने के लिए सम्यक् रूप से अर्हित एक लेखापरीक्षक की नियुक्ति करेगा, जो वार्षिक आम बैठक की समाप्ति तक पद धारण करेगा।

(6) उप-धारा (1) में किसी भी बात के होते हुए भी, सरकारी कंपनी से भिन्न किसी कंपनी का प्रथम लेखापरीक्षक, कंपनी के पंजीकरण की तारीख से तीस दिन के भीतर निदेशक मंडल द्वारा नियुक्त किया जाएगा और यदि बोर्ड ऐसा लेखापरीक्षक नियुक्त करने में असफल रहता है तो वह कंपनी के सदस्यों को सूचित करेगा, जो नब्बे दिन के भीतर असाधारण सामान्य बैठक में ऐसे लेखापरीक्षक की नियुक्ति करेंगे और ऐसा लेखापरीक्षक प्रथम वार्षिक आम बैठक की समाप्ति तक पद धारण करेगा।

(7) उप-धारा (1) या उप-धारा (5) में किसी बात के होते हुए भी, किसी सरकारी कंपनी या किसी अन्य कंपनी की दशा में, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या सरकारों के स्वामित्व में हो या उनके द्वारा, या अंशतः केन्द्रीय सरकार द्वारा और अंशतः एक या अधिक राज्य सरकारों के स्वामित्व में हो, प्रथम लेखापरीक्षक की नियुक्ति भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा कंपनी के पंजीकरण की तारीख से साठ दिन के भीतर की जाएगी और यदि भारत के नियंत्रक-महा लेखापरीक्षक उक्त अवधि के भीतर ऐसे लेखापरीक्षक की नियुक्ति नहीं करते हैं, तो कंपनी का निदेशक मंडल आगामी तीस दिन के भीतर ऐसे लेखापरीक्षक की नियुक्ति करेगा; और यदि बोर्ड आगामी तीस दिन के भीतर ऐसे लेखापरीक्षक की नियुक्ति करने में असफल रहता है, तो वह कंपनी के सदस्यों को सूचित करेगा, जो साठ दिन के भीतर ऐसे लेखापरीक्षक की नियुक्ति असाधारण आम बैठक में करेंगे, जो प्रथम वार्षिक आम बैठक की समाप्ति तक पद धारण करेगा।

(8) लेखापरीक्षक के पद में कोई आकस्मिक रिक्ति-

(झ)   किसी ऐसी कंपनी के अलावा अन्य कंपनी के मामले में, जिसके खाते भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा नियुक्त लेखा परीक्षक द्वारा लेखा परीक्षा के अधीन हैं, तीस दिनों के भीतर निदेशक बोर्ड द्वारा भरी जाएगी, लेकिन यदि ऐसी आकस्मिक रिक्ति लेखा परीक्षक के इस्तीफे के परिणामस्वरूप है, तो ऐसी नियुक्ति भी बोर्ड की सिफारिश के तीन महीने के भीतर बुलाई गई आम बैठक में कंपनी द्वारा अनुमोदित की जाएगी और वह अगली वार्षिक आम बैठक के समापन तक पद धारण करेगा;
(ii)   किसी कंपनी के मामले में, जिसके खाते भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा नियुक्त लेखा परीक्षक द्वारा लेखापरीक्षा के अधीन हैं, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा तीस दिनों के भीतर भरा जाएगा:

बशर्ते कि यदि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक उक्त अवधि के भीतर रिक्ति को नहीं भरते हैं, तो निदेशक मंडल अगले तीस दिनों के भीतर रिक्ति को भरेगा।

(9) उप-धारा (1) के उपबंधों और उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, किसी सेवानिवृत्त लेखापरीक्षक को वार्षिक आम बैठक में पुनः नियुक्त किया जा सकेगा, यदि-

(क)   वह पुनः नियुक्ति के लिए अयोग्य नहीं है;
(ख)   उन्होंने कंपनी को पुनः नियुक्त होने की अपनी अनिच्छा के बारे में लिखित नोटिस नहीं दिया है; और
(ग)   उस बैठक में कोई विशेष प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है जिसमें किसी अन्य लेखा परीक्षक की नियुक्ति की गई हो या यह स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया हो कि उसे पुनः नियुक्त नहीं किया जाएगा।

(10) जहां किसी वार्षिक आम बैठक में किसी लेखापरीक्षक की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति नहीं की जाती है, वहां विद्यमान लेखापरीक्षक कंपनी का लेखापरीक्षक बना रहेगा।

(11) जहां किसी कंपनी को धारा 177 के तहत लेखा परीक्षा समिति गठित करने की आवश्यकता होती है, इस धारा के तहत लेखा परीक्षक की आकस्मिक रिक्ति को भरने सहित सभी नियुक्तियां ऐसी समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखने के बाद की जाएंगी।


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