धारा 36 का संशोधन
धारा 36 का संशोधन
13. आय-कर अधिनियम की धारा 36 की उपधारा (1) में, 1 अप्रैल, 2016 से,—
(क) खंड (iii) के परंतुक में, ''विद्यमान कारबार या वृत्ति के विस्तारण के लिए'' शब्दों का लोप किया जाएगा :
(ख) खंड (vii) के परंतुक के पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंत:स्थापित किया जाएगा, अर्थात् :—
''परंतु यह और कि जहां ऐसे ऋण या उसके भाग की रकम निर्धारिती की उस पूर्ववर्ष की, जिसमें ऐसे ऋण या उसके भाग की रकम अवसूलीय बन जाती है, या किसी पूर्ववर्ती पूर्ववर्ष की आय की संगणना करने में धारा 145 की उपधारा (2) के अधीन अधिसूचित आय संगणना और प्रकटन मानकों के आधार पर, उसे खाते में लेखबद्ध किए बिना, हिसाब में लिया गया है, वहां ऐसे ऋण या उसके भाग को उस पूर्ववर्ष में, जिसमें ऐसा ऋण या उसका भाग अवसूलीय बना जाता है, अनुज्ञात किया जाएगा और यह समझा जाएगा कि ऐसे ऋण या उसके भाग को इस खंड के प्रयोजनों के लिए खाते में अवसूलीय रूप में अपलिखित कर दिया गया है।'';
(ग) खंड (xvi) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंत:स्थापित किया जाएगा, अर्थात् :—
''(xvii) चीनी के विनिर्माण के कारबार में लगी किसी सहकारी सोसाइटी द्वारा गन्ने का उस कीमत पर, जो सरकार द्वारा नियत या अनुमोदित रकम के बराबर या उससे कम है, क्रय करने के लिए उपगत की व्यय की रकम।''

